अग्निमांद्य - अपच (खराब हाजमा)
क्यो और कैसे --
यह रोग जठराग्नि (भोजन पचाने की क्रिया) के धीमे होने से उत्पन्न होता है।
मल - मूत्र, छीक, उबकाई, हिचकी, अधोवायु आदि वेगो के रोकने से।
देर रात्रि तक जागना, कम निद्रा, अधिक शोक, गुस्सा, भय,चिंतित रहना, ईर्षा, निरंतर क्लेश व दुख प्रमुख छुपे कारण है जिन्हें अकसर लोग नहीं समझ पाते हैं !
प्रभाव क्षेत्र --(शारीरिक)
अफारा, पेट फूलना, मल विबंध (पेट साफ न रहना), भूख होने पर भी खाना देखते ही अरुचि,
शिर, वदन दर्द, उत्साह कम, हृदय पर भारी पन व भोजन पश्चात उलटी होना!
प्रभाव क्षेत्र -- मनस (मानसिक) --
लोगों को उत्तर देते समय खीझ,
मृत्यु की बात सोचना,
अक्सर दिल की धड़कन बढी समझना -जो वास्तव में सोचते ही बढ़ जाती है!
व्यक्ति अकसर रोग के बारे में ही सोचता रहता है *
*(IBS) irritable bowel Syndrome!!
ध्यान रखें --- उच्च रक्तचाप (high BP) की शुरुआत इसी रोग से होती है!!
उपचार -- (सहज-सुलभ)
देशी मूली का रस 1 चम्मच
प्याज का रस 1 चम्मच
4 गेहूं बराबर सेंधा नमक
1 गेहूं बराबर हींग साधारण
एक में मिलाकर 1/4 कप ताजा जल के साथ
सुबह व दोपहर 5 दिन तक या अधिक आवश्यकतानुसार ।
? एक ही मात्रा से लाभ शुरू होगा !
उपचार -- (शास्त्रीय)
शन्ख वटी
2 गोळी सुबह दोपहर शाम जल के साथ मन्दाग्नि के लिए पक्का व विश्वसनीय उपचार है।
उपचार -- (सुगन्ध चिकित्सा) (Aromatherapy)
स्वयम् बनाइये - मुस्कुराहट जगाइये!!
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लीजिए लाखों रूपए मूल्य का फार्मूला मुफ्त में भेट है,
स्वीकार करें!!
कपूर ( camphor) 10 gm
अजवायन सत
(Ajowan ext.) 10 gm
पुदीना तैल
(spearmint oil) 10 gm
नीलगिरी तैल
(eucalyptus oil) 5 gm
पिपरमेंट तैल
(mentha oil) 5 gm
लवंग तैल (clove iol) 2 gm
यह सभी किसी भी अच्छे अत्तार के यहाँ साधारण मूल्य पर उपलब्ध रहती हैं।
सभी को एक साफ शीशी में भरकर हिलाकर ढक्कन लगाकर रखें 60 मिनट बाद फिर हिलाएं, बस आपकी खुशबूदार , जादू भरी "सुगंध धारा" (प्रचलित अमृत धारा से ज्यादा कारगर)
तैयार है!!
दो-चार बूँद बताशा, चीनी की गोलियों या जल के साथ दिनभर में 2 या 3 बार।
अथवा कुछ बूंद साफ रूमाल में डालकर सुघाये,
जुकाम में भी कारगर है!
?सुधीजन बनाकर व उचित मूल्य में बेचकर साल में लाखों कमा सकते हैं!!
सादर समर्पित -
वैधराज मदन मोहन सिंह