एलर्जी (Allergy)
किसी भी चीज के प्रति अतिसंवेदनशील होना ही एलर्जी है, जिसे स्वास्थ्य की भाषा में एटोपी (atopy) भी कहते हैं। एलर्जी किसी से भी हो सकती है, मौसम में बदलाव से, किसी खाने की चीज से, पालतु जानवर से, धूल से, धुएं से, सौंदर्य प्रसाधनों से या दवाओं आदि से।
एलर्जी में शरीर का इम्यून सिस्टम कुछ खास चीजों को स्वीकार नहीं कर पाता। इन चीजों के प्रति इम्यूनिटी अयोग्य तरह से प्रतिक्रिया देती है। इम्यूनिटी द्वारा दी जाने वाली प्रतिक्रिया ही एलर्जी होती है। यूं देखा जाए तो अधिकतर एलर्जी खतरनाक नहीं होती लेकिन कभी कभी समस्या गंभीर हो जाती है।
एलर्जी को रोका जा सकता है, लेकिन इसके लिए एलर्जी पैदा करने वाले कारणों से पूरी तरह दूर रहना होगा। यूं तो एलर्जी फैलने वाली बीमारी नहीं है फिर भी यदि किसी को नाक बहने और आंखों से पानी आने वाली एलर्जी हो तो उससे संपर्क बनाकर रखने में ही बेहतरी है। संभव हो तो उसके द्वारा इस्तेमाल किए गए सामान को भी इस्तेमाल न करें।
एलर्जी भी कई तरह की होती है (Types of Allergy)
1. डस्ट एलर्जी (Dust Allergy)
2. लेटेक्स एलर्जी (Latex Allergy)
3. मोल्ड एलर्जी (Mold Allergy)
4. इन्सेक्ट स्टिंग एलर्जी (Insect Sting Allergy)
5. पालतू जानवर से एलर्जी (Pet Allergy)
6. राइनाइटिस एलर्जी (Rhinitis Allergy)
7. स्किन एलर्जी (Skin Allergy)
8. ड्रग एलर्जी (Drug Allergy)
9. आइ एलर्जी (Eye Allergy)
एलर्जी के लक्षण
एलर्जी के कारण- (cause of allergy)
1. धूल (Dust)
धूल के कण बहुत छोटे जीव होते हैं जो हमारे- आस पास की ज्यादातर वस्तुओं पर रहते हैं। यह कण उच्च आद्रता में पनपते हैं जो मृत त्वचा, बैक्टीरिया और फंगस आदि से अपना खाना प्राप्त करते हैं।
2. कीट (Insect)
कीटों से एलर्जी वाले लोगों को कीटों के काटने से डंक लगने से त्वचा एकदम लाल होकर फूल जाती है। इतना ही नहीं उन्हें उल्टी, चक्कर आना और बुखार भी हो सकता है।
3. खाना (Food)
कुछ लोगों को रोजमर्रा में खायी जाने वाली चीजों से भी एलर्जी होती है, जैसे मूंगफली, दूध और अंडा आदि। खाद्य पदार्थ से एलर्जी वाले लोगों को खाने के बाद जी मिचलाने, शरीर में खुजली होने या दाने निकलने की समस्या हो सकती है।
4. रबड़ (Latex)
रबड़ से बना कोई भी उत्पाद, एलर्जी का कारण हो सकता है। कुछ लोगों को रबड़ से बने उत्पाद भी नुकसान पहुंचाते हैं, जैसे दस्ताने, कंडोम, मेडिकल उपकरण आदि के इस्तेमाल से जलन, नाक बहना, छींकना, सांस की घबराहट और खुजली की समस्याएं हो सकती हैं।
5. खुशबू (Fragrance)
अच्छी खुशबू भले अच्छी लगती हो लेकिन यह भी कुछ लोगों की एलर्जी का कारण हो सकती है। परफ्यूम, खुशबू वाली मोमबत्तियां, कई तरह के ब्यूटी प्रॉडक्ट आदि की खुशबू से सिर दर्द, जी मिचलाने और नाक की एलर्जी हो सकती है।
6. जानवर (Pets)
पालतु जानवर भी कई लोगों की एलर्जी का कारण होते हैं। जानवरों के बाल, उनके मुंह से निकलने वाली लार, रूसी आदि से कई गंभीर परेशानियां हो सकती हैं।
7. घास (Grass)
कई बार घास, पेड़ और फूल भी एलर्जी का कारण होते हैं। यह सब मौसमी एलर्जी का कारण होते हैं, जिनसे खुजली, आंखों में जलन, लगातार छींक आना और खुजली आदि की समस्या हो सकती है।
सामान्य उपचार
एलर्जी से निजात पाने के लिए उपाय (Tips to Prevent Allergy)
- धूल, धुंआ और गंदगी से बचकर रहें।
- कुछ दवाओं जैसे एस्पिरीन, निमुसलाइड आदि के सेवन में सावधानी बरतें।
- खट्टी चीजों, जैसे अचार आदि का इस्तेमाल कम करें।
- ऐसे खाद्य पदार्थ जिन्हें खाने से एलर्जी है, उन्हें न खाएं।
- गंदगी से एलर्जी वाले लोगों को समय-समय पर चादर, तकिये के कवर और पर्दे आदि बदलते रहने चाहिए।
पेट के निचले हिस्से में या मुत्राशय में तेज दर्द पथरी की निशानी हो सकती है। यह एक ऐसी समस्या है जो किसी भी इंसान को हो सकती है। गुर्दे की पथरी में जो दर्द होता है वह बेहद असहनीय हो जाता है। इस बीमारी को समझना और इससे दूर रहने के उपाय जानना बेहद आवश्यक है।
गुर्दे की पथरी (About Kidney Stone in Hindi)
गुर्दे की पथरी (Gurde ki Pathri) की समस्या तब पैदा होती है जब गुर्दे (Kidney) के अंदर छोटे-छोटे पत्थर बन जाते है। ये आमतौर पर मध्य आयु यानि चालीस साल या उसके बाद पता लगने शुरू होते है। लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है। गुर्दे की पथरी कम आयु वाले बच्चों और युवाओं में भी देखने को मिलती है।
मूत्र में पाये जाने वाले रासायनिक तत्वों से मूत्र के अंगों में पथरी बनती है। इन तत्वों में यूरिक एसिड, फास्फोरस कैल्शियम और ओ़क्जेलिक एसिड शामिल हैं। लगभग 90 प्रतिशत पथरी का निर्माण कैल्शियम ओक्जेलेट (Calcium Oxalate) से होता है।
गुर्दे में एक समय में एक या अधिक पथरी हो सकती है। सामान्यत: ये पथरियाँ बिना किसी तकलीफ के मूत्रमार्ग से शरीर से बाहर निकल जाती हैं। हालांकि, यदि ये पर्याप्त रूप से बड़ी हो जाएं, 2-3 मिमी, तो ये मूत्रवाहिनी में अवरोध उत्पन्न कर सकती हैं। इस स्थिति में मूत्रांगो के आस-पास असहनीय पीड़ा होती है।
गुर्दे की पथरी (Kidney Stone) का दर्द आमतौर पर काफी तेज होता है। पथरी जब अपने स्थान से नीचे की तरफ़ खिसकती है तब यह दर्द पैदा होता है। पथरी गुर्दे से खिसक कर युरेटर और फिर यूरिन ब्लैडर में आती है।
बच्चों में पथरी (Kidney Stone in Kids)
कुपोषित बच्चों के मूत्राशय में पत्थर कभी-कभी सामान्य से बड़े बन जाते हैं। ये कुपोषण के कारण शरीर के प्रोटीन के टूट जाने के कारण बनते है। जिसमें पेशाब में फालतू पदार्थों का जमाव हो जाता है। ये कण लवणों के जमाव के लिए केन्द्रक के रूप में काम करते हैं।
गुर्दे की पथरी के लक्षण
गुर्दे की पथरी के कारण (Reason of Kidney Stone)
पेशाब की पथरी पेशाब में उपस्थित लवणों व खनिजों के जमाव से बनती हैं। जब लवणों और खनिजों की परतें विभिन्न जगहों पर जमा होती जाती हैं तो इन महीन पत्थरों का आकार बढ़ता जाता है। ये सभी लवण और खनिज खाने की चीजों व पानी से शरीर में आए होते है। कुछ सब्जियां जैसे पालक, अरबी के पत्ते और टमाटरों में बहुत अधिक लवण होते हैं।
जमीनी पानी में भी काफी सारे लवण होते हैं। कुएँ या बोरवेल का पानी भी पथरी बनने का कारण होता है। ये लवण धीरे-धीरे करके शरीर में जमा हो जाते हैं और पत्थर बना लेते हैं।
फॉस्फेट और कॉर्बोनेट के पत्थरों की सतह मुलायम होती है और ऑक्जेलेट के पत्थरों की खुरदुरी । इस कारण से ऑक्जेलेट के पत्थरों के कारण खून भी निकल सकता है।
गुर्दे की पथरी के कारण (Causes of Kidney Stone)
पथरी एक आम बीमारी है जो अकसर गलत-खानपान के कारण भी हो जाती है। इस बीमारी के कुछ मुख्य कारण निम्न हैं:
- हर दिन पानी की पर्याप्त मात्रा का सेवन न करना
- कैफीन और शराब का अधिक उपयोग करना
- मूत्र मार्ग में संक्रमण होना
सामान्य उपचार
गुर्दे की पथरी होने पर कई बार घरेलू उपाय भी कारगर होते हैं। गुर्दे की पथरी होने पर ज्यादा से ज्यादा खान-पान पर ध्यान देना चाहिए। इसके अलावा गुर्दे की पथरी होने पर निम्न उपाय भी अपनाने चाहिए जैसे:
गुर्दे की पथरी का इलाज (Treatment of Kidney Stone in Hindi)
- पथरी के मरीज को दिन में कम से कम 5-6 लीटर पानी पीना चाहिये। पथरी होने पर पर्याप्त जल पीयें ताकि 2 से 2.5 लीटर मूत्र रोज बने। अधिक मात्रा में मूत्र बनने पर छोटी पथरी मूत्र के साथ निकल जाती है
- आहार में प्रोटीन, नाइट्रोजन तथा सोडियम की मात्रा कम हो।
- ऐसा भोजन करें जिनमें आक्जेलेट् की मात्रा अधिक हो; जैसे चाकलेट, सोयाबीन, मूंगफली, पालक, आदि के साथ कोल्ड ड्रिंक्स से दूर रहें।
- नारंगी आदि का रस (जूस) लेने से पथरी का खतरा कम होता है।
- डॉक्टर पथरी के मरीजों को अंगूर और करेला आदि भी खाने की सलाह देते हैं।
स्वाइन फ्लू या H1N1 (H1N1 Flu) एक संक्रमण है, जो इन्फ्लूएंजा ए वायरस (Influenza Virus) के कारण होता है। आमतौर पर यह बीमारी सूअरों में होती है, इसलिए इसे स्वाइन फ्लू कहा जाता है, लेकिन कई बार सूअर के सीधे संपर्क में आने पर यह मनुष्य में भी फैल जाती है। यह बहुत जल्दी फैलने वाला रोग है। इससे बचने के लिए संक्रमित लोगों से दूर रहना चाहिए।
भारत में स्वाइन फ्लू (Swine Flu in India)
स्वाइन फ्लू वर्ष 2009 में भी फैला था जिसके कारण देश भर कई लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। हालांकि, वर्ष 2015 में फैल रहा स्वाइन फ्लू का वायरस पिछली बार की तुलना में कम घातक है। स्वाइन फ्लू के वायरस से संक्रमित मरीज में लक्षण नजर आने से लेकर अगले सात दिनों तक इसका संक्रमण बना रहता है। साथ ही इससे जुड़ा एक तथ्य यह भी है कि स्वाइन फ्लू सर्दियों में अधिक प्रभावी होता है।
स्वाइन फ्लू के लक्षण
माना जाता है कि स्वाइन फ्लू अधिकतर सूअरों के करीब रहने वाले लोगों में तेजी से फैलता है। हालांकि कई अन्य कारक भी है जो स्वाइन फ्लू के लिए जिम्मेदार हैं लेकिन इनमें से सबसे महत्वपूर्ण कारण है सूअरों का संपर्क। कुछ अन्य कारक निम्न हैं:
स्वाइन फ्लू के कारण (Causes of Swine Flu)
- संक्रमित सूअरों के साथ रहने वाले व्यक्ति स्वाइन फ्लू की चपेट में आ सकते हैं तथा आगे चलकर वे व्यक्ति अन्य लोगों को संक्रमित कर सकते हैं।
- बीमारी के होने का खतरा बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और दिल, किडनी, डायबिटीज से ग्रस्त लोगों में अधिक रहता है। जिनकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता कम होती है, वे भी स्वाइन फ्लू का शिकार हो सकते हैं।
- यहां यह ध्यान रखने वाली बात है कि सही तरह से पके हुए रेड मीट से स्वाइन फ्लू नहीं होता लेकिन अगर पकाने में असावधानी बरती जाए तो कुछ समस्याएं अवश्य आ सकती हैं।
सामान्य उपचार
स्वाइन से बचाव का सबसे बेहतरीन तरीका है इससे बचकर रहना। संक्रमित रोगी से दूर रहकर इस बीमारी से आसानी से बचा जा सकता है। कुच अन्य उपाय निम्न हैं:
स्वाइन फ्लू से बचाव (Prevention of Swine Flu in Hindi)
- संक्रमित लोगों से दूर रहना ही इस बीमारी का बचाव है।
- साफ-सफाई का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।
- खांसते या छींकते समय रुमाल का प्रयोग करें।
- गंदे हाथों से आंख, नाक या मुंह छूने से बचें और बाहर खाने से परहेज करें।
- बीमार लोगों से नज़दीकी संपर्क रखने से बचें
- अस्पताल या अन्य किसी सार्वजनिक स्थान पर जाने से पहले मास्क पहनें।
- संक्रमित व्यक्ति के पास जाना अगर जरूरी हो तो मास्क के साथ-साथ दस्ताने भी पहनें। इससे आप बीमारी से सुरक्षित रह सकते हैं।
- स्वाइन फ्लू से बचने के लिए भारत में स्वाइन फ्लू वैक्सीन मौजूद है। स्वाइन फ्लू की वैक्सीन एक साल तक इस बीमारी से आपकी रक्षा करती है।
- स्वाइन फ्लू के लक्षण नज़र आने पर मरीज को तुरन्त अस्पताल में भर्ती करा दें ताकि उसका सही इलाज हो सके।
- यदि आप इन्फ़्लुएन्ज़ा से पीड़ित हों तो आप अन्य लोगों को संक्रमण से बचाने के लिए उनसे दूर रहें।
- संक्रमित लोगों के संपर्क में रहने से आप बार-बार इस बीमारी के शिकार हो सकते हैं।
डीहाइड्रेशन यानि निर्जलीकरण। मनुष्य शरीर में पानी के कम हो जाने की अवस्था को डीहाइड्रेशन (Dehydration) कहते हैं। वैज्ञानिक भाषा में डीहाइड्रेशन को हाइपोहाइड्रैशन (Hypohydration) कहते हैं। शरीर में पानी की कमी (Pani ki Kami) के कारण शरीर से खनिज पदार्थ जैसे कि नमक और शक्कर कम हो जाते हैं। डीहाइड्रेशन के दौरान, शरीर की कोशिकाओं से पानी सूखता रहता है जिसके कारण शरीर के कार्य करने का संतुलन असामान्य हो जाता है।
पानी शरीर के लिए बेहद आवश्यक होता है, यह शरीर से विषैले पदार्थ निकालता है, शरीर की त्वचा को स्वस्थ रखता है, पाचन प्रक्रिया में सहायक होता है और शरीर के जोड़ों और आँखों के लिए भी फायदेमंद होता है। शरीर में पानी की कमी के कारण मध्यम या गंभीर समस्या भी उजागर हो सकती है।
शरीर में पसीने के लगातार आते रहने से शरीर का पानी कम होता रहता है। गर्मियों में डीहाइड्रेशन का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। बुखार, उल्टी, दस्त के कारण भी शरीर में डीहाइड्रेशन हो सकता है। डीहाइड्रेशन का शिकार किसी भी उम्र का व्यक्ति हो सकता है और इसका कोई ठोस कारण भी नहीं होती है। बच्चों से लेकर बड़े-बूढ़ों तक में यह शिकायत हो सकती है।
डीहाइड्रेशन के लक्षण
डीहाइड्रेशन के कारण (Reasons & Causes of Dehydration)
- शरीर में पानी की गंभीर समस्या कई बार जानलेवा भी हो सकती है।
- शरीर से पांच प्रतिशत द्रव खत्म होने पर कमज़ोरी, प्यास, उबकाई, चिड़चिड़ापन होता है।
- शरीर से दस प्रतिशत द्रव खत्म होने पर सिर दर्द, चक्कर और अंगों में सनसनाहट पैदा हो सकती है। शरीर की त्वचा नीली पड़ने लगती है और शरीर कमज़ोर हो जाता है।
- शरीर से पंद्रह प्रतिशत द्रव खत्म होने पर देखने और सुनने की शक्ति पर असर पड़ता है। जीभ में सूजन हो जाती है और खाना निगलने में दिक्कत होती है।
- शरीर से पंद्रह प्रतिशत से ज्यादा द्रव खत्म होने पर इंसान की मृत्यु भी हो सकती है।
- दस्त के कारण शरीर में हुए डीहाइड्रेशन से मनुष्य की मृत्यु के आसार ज्यादा होते हैं। गंभीर डीहाइड्रेशन (Pani ki Kami) की वजह से मनुष्य का ब्रेन डैमेज यानि उसके मस्तिष्क को हानि भी पहुंच सकती है। साथ ही हाइपोवोलेमिक शॉक का खतरा भी रहता है जिसमें शरीर के कई अंगों को हानि पहुंच सकती है।
- यदि आपको चक्कर आ रहे हैं, या आप किसी भी कार्य को करने में खुद को असमर्थ पा रहे हैं तो ऐसे समय में डॉक्टर को दिखाना बेहद आवश्यक होता है। दो दिन से ज्यादा कब्ज या बुखार रहने पर तुरंत डॉक्टर से सम्पर्क करें।
सामान्य उपचार
डीहाइड्रेशन के उपाय (Treatment for Dehydration)
- जितना हो सके ज्यादा से ज्यादा पानी पिएं।
- नवजात बच्चों में डीहाइड्रेशन के उपचार (pani ki kami ka ilaj) के लिए बच्चे को मां का दूध व पानी पिलाते रहें। पानी में ओआरएस का घोल मिलाकर पिलाएं।
- ज्यादा भागदौड़ वाला काम ना करें और जितना हो सके आराम करें।
- धूप में घर से बाहर ना निकलें और ठंडी जगह पर बैठे रहें।
- दूध, कॉफी, फ्रूट जूस जैसे पदार्थों का सेवन करने से बचें।
- इलेक्ट्रोलाइट्स से युक्त स्पोर्ट्स ड्रिंक्स का सेवन अवश्य करें।
घमौरियों को अंग्रेजी में प्रिकली हीट (Prickly Heat) कहते हैं। गर्मियों के मौसम में घमौरियां होना आम बात है। गर्मी के मौसम में शरीर से पसीना अधिक मात्रा में बहता है। यदि समय रहते इस पसीने को साफ़ ना किया जाए तो यह शरीर की त्वचा में ही सूख जाता है जिसके कारण पसीने की ग्रंथियां बंद हो जाती हैं और शरीर में घमौरी होने लगती हैं।
घमौरियों के विषय में अधिक जानकारी (Details of Prickly Heat in Hindi)
वैज्ञानिक भाषा में घमौरी (Ghamori) को मिलिएरिया रूब्रा कहा जाता है। यह एक प्रकार का चर्मरोग होता है। बरसात के मौसम में भी अधिकतर लोगों को घमौरी की शिकायत होती है। घमौरी व्यक्ति के शरीर पर होने वाली छोटी व लाल फुंसियां और दाने (Heat Rash) हैं जिनमें अक्सर खुजली होती रहती है। कई बार पेट में कब्ज रहने के कारण भी शरीर पर घमौरी उभर सकती हैं।
घमौरी अक्सर छाती, बगल, हाथों और पैरों पर निकलती हैं। यह रोग किसी भी व्यक्ति को लग सकता है। गर्म शहरों में रहने वाले लोग इसका ज्यादा शिकार होते हैं। नवजात शिशुओं में घमौरी (Prickly Heat In Babies) अधिक निकलती है क्योंकि उन्हें पसीना अधिक आता है इसलिए उनमें बहुत सावधानी रखने की जरूरत होती है।
घमौरियां के लक्षण
घमौरी के दौरान शरीर में खुजली, हल्की सूजन और चुभन महसूस होने लगती है। घमौरी के दाने धूप के सीधे संपर्क में आने से बढ़ जाते हैं। आमतौर पर घमौरी कुछ दिनों में अपने आप सही हो जाती है लेकिन कुछ लोगों में यह हफ्तों और महीनों तक के लिए हो सकती है। इसलिए एक हफ्ते तक घमौरी के ठीक ना होने पर डॉक्टर से जरूर परामर्श लेना चाहिए।
घमौरी (Prickly Heat) के कारण लोगों में थकावट (Heat Exhaustion) और धूप में चिड़चिड़ाहट की शिकायत भी होती है। घमौरी के कारण लू लगना का खतरा भी पैदा हो सकता है।
घमौरियां भी कई प्रकार की होती हैं जैसे मिलिएरिया क्रिस्टलाइन (Miliaria Crystallina), मिलिएरिया रूब्रा (Miliaria Rubra) और मिलिएरिया प्रॉफंडा (Miliaria Profunda)। मिलिएरिया प्रॉफुंडा में सबसे अधिक खतरा रहता है और इसे वाइल्डफायर (Wildfire Rash) भी कहते हैं।
सामान्य उपचार
घमौरियों से बचाव का सबसे बेहतर उपाय होता है गर्मी से बचकर रहना। इसके अलावा घमौरियों (Ghamoriyan) से बचाव के कुछ अहम उपाय निम्न हैं:
घमौरियों से बचाव (Treatment of Prickly Heat Remedies)
- सिंथेटिक फैब्रिक से बने वस्त्रों को ना पहनें।
- सूती और ढीले ढाले कपड़े पहनें।
- खूब पानी पिएं और नहाएं।
- बाहर से घर लौटने के कुछ देर बाद स्नान करें।
- शरीर के हिस्सों को ताज़ा हवा लगने दें।
- मसालेदार भोजन से बचें। सादा भोजन ही खाएं।
- बारिश के पानी से स्नान करने से शरीर पर निकली फुंसियां और दानें दूर होते हैं।
- रोजाना सुबह नीम की चार-पांच पत्तियां चबाएं।
- शरीर पर मुल्तानी मिट्टी का लेप लगाएं।
- नीम की पत्तियों को पानी में उबालकर इस पानी से स्नान करें।
- नारियल के तेल में कपूर मिलाकर इस तेल से पूरे शरीर की मालिश करें।
- कैलामाइन लोशन का प्रयोग करें।
- गीले शरीर पर पाऊडर ना लगाएं। जरूरत से ज्यादा पाऊडर का प्रयोग करने से भी बचें।
हाई ब्लड प्रेशर या उच्च रक्तचाप की समस्या आजकल बेहद आम होती जा रही है। उच्च रक्तचाप के दौरान मरीज के शरीर में रक्त का प्रवाह बेहद तेज हो जाता है। इस स्थिति में आपके हृदय को अधिक काम करना पड़ता है। आइये जानें इससे जुड़ी अन्य बातें:
उच्च रक्तचाप (About High Blood Pressure in Hindi)
रक्त द्वारा धमनियों पर पड़ने वाले दबाव को ब्लड प्रेशर कहते हैं। सामान्यतः हमारी धमनियों में बहने वाले रक्त का एक निश्चित दबाव होता है, जब यह दबाव अधिक हो जाता है तो धमनियों पर दबाव बढ़ जाता है और इस स्थति को उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure) से जाना जाता है| लगातार उच्च रक्तचाप शरीर को कई तरीके से हानि पहुंचा सकता है। यहाँ तक की हार्ट फेल भी हो सकता है।
सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर (Systolic Blood Pressure)
निलयी प्रकुंचन (Ventricular systole) के दौरान रक्त को महाधमनी में धकेलने लिए बायें निलय (Ventricle) के संकुचित होने पर बनने वाला अधिकतम रक्त-चाप सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर कहलाता है।
औसत ब्लड प्रेशर (Blood Pressure Range in Normal Condition)
सामान्य स्वस्थ वयस्क का विश्रामावस्था में सिस्टोलिक प्रेशर का परिसर 100 Hg. से 140 मिमी. पारे के बीच रहता है तथा औसतन 120 मिमी पारे के बीच रहता है।
उच्च रक्तचाप के लक्षण
उच्च रक्तचाप के होने में बहुत सारे फैक्टर्स अहम भूमिका निभाते हैं जिनमें से सबसे महत्वपूर्ण है आसीन जीवनशैली। शारीरिक श्रम की कमी के कारण भी कई बार यह बीमारी लोगों को परेशान करती है। उच्च रक्तचाप के कई अन्य कारण निम्न हैं:
उच्च रक्तचाप के कारण (Reason for High Blood Pressure)
- धूम्रपान
- मोटापा
- निष्क्रियता
- नमक का ज्यादा सेवन
- शराब पीना
- तनाव
- बढ़ती उम्र
- आनुवंशिकता
- पारिवारिक इतिहास
- पुरानी किडनी की बीमारी
- थाइरोइड डिसऑर्डर
सामान्य उपचार
रक्तचाप (Blood Pressure) बढ़ने पर किस तरह अपना ध्यान रखना इसकी जानकारी होना बेहद जरूरी है। साथ ही समय-समय पर डॉक्टरी जांच इस बीमारी से बचाने में बहुत कारगर होती है। उच्च रक्तचाप से बचने के कुछ प्रमुख उपाय निम्न हैं:
उच्च रक्तचाप से कैसे बचें (Treatment of High Blood Pressure in Hindi)
- प्रतिदिन एक घंटा हल्का या तेज किसी प्रकार का व्यायाम जरूर करें।
- खाने में हाई फाईबर वाले चीजें लेनी चाहिए।
- खुद को एक्टिव रखने का अधिक से अधिक प्रयास करना चाहिए।
- समय-समय पर डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।
चिकनगुनिया बुखार (Chikungunya) एक वायरस बुखार है जो एडीज मच्छर एइजिप्टी के काटने के कारण होता है। चिकनगुनिया और डेंगू के लक्षण लगभग एक समान होते हैं। इस बुखार का नाम चिकनगुनिया स्वाहिली भाषा से लिया गया है, जिसका अर्थ है ''ऐसा जो मुड़ जाता है'' और यह रोग से होने वाले जोड़ों के दर्द के लक्षणों के परिणामस्वरूप रोगी के झुके हुए शरीर को देखते हुए प्रचलित हुआ है।
चिकनगुनिया के लक्षण (Symptoms of Chikungunya)
चिकनगुनिया में जोड़ों के दर्द के साथ बुखार आता है और त्वचा खुश्क हो जाती है। चिकनगुनिया सीधे मनुष्य से मनुष्य में नहीं फैलता है। यह बुखार एक संक्रमित व्यक्ति को एडीज मच्छर के काटने के बाद स्वस्थ व्यक्ति को काटने से फैलता है। चिकनगुनिया से पीड़ित गर्भवती महिला को अपने बच्चे को रोग देने का जोखिम होता है।
चिकनगुनिया के लक्षण
चिकगुनिया के कारण (Causes of Chikungunya in Hindi)
चिकनगुनिया मुख्य रूप से मच्छरों के काटने के कारण ही होता है। इसके सामान्य कारण निम्न हैं:
- मच्छरों का पनपना।
- रहने के स्थान के आसपास गंदगी होना।
- पानी का जमाव।
सामान्य उपचार
चिकनगुनिया होने पर डॉक्टर की सलाह लेना सबसे जरूरी है। साथ ही चिकनगुनिया से पीड़ित रोगी को निम्न उपाय अपनाने चाहिए:
चिकनगुनिया का प्राथमिक उपचार (Treatment of Chikungunya in Hindi)
- अधिक से अधिक पानी पीएं, हो सके तो गुनगुना पानी पीएं।
- ज्यादा से ज्यादा आराम करें।
- चिकनगुनिया के दौरान जोड़ों में बहुत दर्द होता है जिसके लिए डाॅक्टर की सलाह पर ही दर्द निवारक (Pain Killer) लें।
- दूध से बने उत्पाद, दूध-दही या अन्य चीजों का सेवन करें।
- रोगी को नीम के पत्तों को पीस कर उसका रस निकालकर दें।
- रोगी के कपड़ों एवं उसके बिस्तर की साफ-सफाई पर खास ध्यान दें।
- करेला व पपीता और गिलोय के पत्तों का रस काफी फायदेमंद माना जाता है।
- नारियल पानी पीने से शरीर में होने वाली पानी की कमी दूर होती है और लीवर को आराम मिलता है।
- ऐस्प्रिन बुखार होने पर कभी ना लें, इससे काफी समस्या हो सकती है।
चिकनगुनिया में बच्चों की देखभाल (Chikungunya in Children)
- बच्चों का खास ख्याल रखें।
- बच्चे नाजुक होते हैं और उनका इम्यून सिस्टम कमजोर होता है इसलिए बीमारी उन्हें जल्दी पकड़ लेती है। ऐसे में उनकी बीमारी को नजरअंदाज न करें।
- बच्चे खुले में ज्यादा रहते हैं इसलिए इन्फेक्शन होने और मच्छरों से काटे जाने का खतरा उनमें ज्यादा होता है।
- बच्चों घर से बाहर पूरे कपड़े पहनाकर भेजें। मच्छरों के मौसम में बच्चों को निकर व टी - शर्ट न पहनाएं। रात में मच्छर भगाने की क्रीम लगाएं।
- अगर बच्चा बहुत ज्यादा रो रहा हो, लगातार सोए जा रहा हो, बेचैन हो, उसे तेज बुखार हो, शरीर पर रैशेज हों, उलटी हो या इनमें से कोई भी लक्षण हो तो फौरन डॉक्टर को दिखाएं।
- आमतौर पर छोटे बच्चों को बुखार होने पर उनके हाथ - पांव तो ठंडे रहते हैं लेकिन माथा और पेट गर्म रहते हैं इसलिए उनके पेट को छूकर और रेक्टल टेम्प्रेचर लेकर उनका बुखार चेक किया जाता है। बगल से तापमान लेना सही तरीका नहीं है, खासकर बच्चों में। अगर बगल से तापमान लेना ही है तो जो रीडिंग आए, उसमें 1 डिग्री जोड़ दें। उसे ही सही रीडिंग माना जाएगा।
सीने में दर्द ( Chest Pain) की बात आते ही हम दिल के दौरे (Heart Attack) की बात सोचने लगते हैं, मगर सीने में दर्द कई कारणों से हो सकता है। फेफड़े, मांसपेशियाँ, पसली, या नसों में भी कोई समस्या उत्पन्न होने पर सीने में दर्द होता है। किसी-किसी परिस्थिति में यह दर्द भयानक रूप धारण कर लेता है जो मृत्यु तक का कारण बन जाता है। लेकिन एक बात ध्यान में रखें कि खुद ही रोग की पहचान न करें और सीने में दर्द को नजरअंदाज न करें, तुरन्त चिकित्सक के पास जायें।
सीने में दर्द के लक्षण
एनजाइना (Angina) : हृदय (Heart) के कारण जब सीने में दर्द होता है तब चिकित्सा शास्त्र के अनुसार इसको एनजाइना कहते हैं। एनजाइना से ग्रस्त रोगी को सीने में दर्द कुछ ही देर तक होता है या परिस्थिति बिगड़ जाने पर दर्द की अवधि बढ़ जाती है। साधारणतः यह दर्द कंधे, बाँह, पीठ, पेट के ऊपरी भाग में होता है। एनजाइना में धमनियों के सिकुड़ जाने के कारण रक्त का हृदय में आवागमन बाधित हो जाता है। जब धमनियों में रक्त का थक्का जमने लगता है तब साँस लेने में मुश्किल होने लगती है और सीने में दर्द शुरू हो जाता है। अगर परिस्थिति को संभाला नहीं गया तो मृत्यु तक हो सकती है। एनजाइना का दर्द साधारणतः आनुवंशिकता के कारण, मधुमेह, हाई कोलेस्ट्रॉल, पहले से हृदय संबंधित रोग से ग्रस्त होने के कारण होता है।
उच्च रक्तचाप: जो धमनियाँ रक्त को फेफड़ों तक ले जाती है उसमें जब रक्त का चाप बढ़ जाता है तब सीने में दर्द होता है और इस अवस्था को उच्च रक्तचाप (Pulmonary Hypertension) कहते हैं।
एसिडिटी (Acidity): यह साधारणत गैस्ट्रो इसोफेगल रिफ्ल्क्स डिज़ीज़ (गर्ड) (भाटा रोग) के कारण होता है।
फेफड़ों में रोग (Lung Disease) : जब रक्त धमनियों में थक्का जमने लगता है तब फेफड़ों के टिशु या ऊतकों में रक्त का प्रवाह रुकने लगता है, ऐसा होने से बेचैनी होने लगती है और साँस लेने में मुश्किल होता है, जो बाद में दर्द का कारण बनता है।
डर के कारण (Fear Psycosis): कभी-कभी दिल में दर्द अत्यधिक डर, अचानक कोई सदमा, दिल की धड़कन के बढ़ने, अत्यधिक पसीना और साँस में तकलीफ के कारण भी होता है।
तनाव: तनाव के कारण दिल की धड़कन तेज हो जाती है, साँस लेने में तकलीफ होने लगती है और रक्त चाप बढ़ जाने के कारण भी हृदय में रक्त संचार की गति को नुकसान पहुँचता है, इन सब कारणों से भी सीने में दर्द होता है।
सामान्य उपचार
- सीने में दर्द (Chest Pain) का सीधा संबंध हमारे अनियोजित और अस्वस्थ खान-पान से है। खान पान में सुधार के साथ साथ हमें नियमित रूप से व्यायाम करना चाहिए।
- जो व्यायाम शरीर के लिए उपयुक्त हो उस व्यायाम को जरूर करें, जैसे- तेज कदमों से चलना, सीढ़ियाँ चढ़ना, बैडमिंटन या टेनिस खेलना आदि।
- आहार में फाइबर की मात्रा को बढ़ाएं और कैलोरी की मात्रा को कम करें।
- खाने में नमक की मात्रा को कम करें और अगर हो सके तो बिलकुल छोड़ दें।
- धूम्रपान हृदय संबंधी बीमारी को बढ़ाने में अहम् भूमिका निभाता है। अतः इसको छोड़ना फायदेमंद है।
थकान एक सामान्य अवस्था है, अधिक शारीरिक या मानसिक परिश्रम करने से शरीर में थकान आ जाती है और शरीर सुस्त हो जाता है। थकान, कमजोरी से अलग है। आराम करने पर थकान चली जाती है जबकि कमजोरी बनी रह सकती है।
क्या है थकान (About Fatigue in Hindi)
थकान की वजह सिर्फ कमजोरी हो ऐसा जरूरी नहीं है। हमेशा होने वाली थकान (Thakan) गलत जीवनशैली से लेकर कई रोगों का संकेत हो सकती है।
अगर आप पूरे दिन थकान महसूस करते हैं, तो इसे नजरअंदाज न करें। इसका बुनियादी अर्थ है कि शारीरिक या मानसिक स्तर पर कहीं कुछ ठीक नहीं है।
थकान के लक्षण
अधिक शारीरिक परीश्रम करने पर तो थकान हो सकती है लेकिन अगर थकान लगातार हो तो यह एक गंभीर मुद्दा हो सकता है। जानिएं किन हालातों में अधिक थकान होती है।
थकान के कारण (Causes of Fatigue in Hindi)
- शारीरिक स्तर पर इसके कई कारण हो सकते हैं जैसे एनीमिया, थाइराइड, शुगर और कोलेस्ट्रॉल का बड़ा हुआ स्तर।
- शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं (Red Blood Cell) की कमी से एनीमिया की दिक्कत होती है, जिसका एक प्रमुख लक्षण है थकान। आजकल महिलाओं में यह समस्या अधिक पाई जाती है जिससे बचाव के लिए आयरन (Iron) से भरपूर डाइट फायदेमंद होती है।
- हाइपोथायराइड और मधुमेह (Diabetes) की स्थिति में शरीर में मेटाबॉलिज्म (Metabolism) सही तरीके से काम नहीं करता जिसके कारण कोशिकाओं को पर्याप्त भोजन नहीं मिलता है, इसलिए शरीर की ऊर्जा तेजी से खत्म हो जाती है और आप जल्दी थक जाते हैं।
- यह हल्के बुखार की वजह से भी हो सकता है जो इंफेक्शन का नतीजा होता है।
- बहुत ज्यादा शुगर या रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट्स जैसे चावल, मैदा आदि खाना, लम्बे अंतराल पर खाना खाना और सही तरह का भोजन न खाने से भी आदमी थकान महसूस करता है।
- मानसिक स्तर पर होने वाली थकान का अर्थ है कि आप तनावग्रस्त हैं।
- अवसाद (Depression) की स्थिति में भी बहुत अधिक थकान, सिरदर्द और कमजोरी महसूस होती है। अवसाद की वजह से थकावट होना आज की जीवनशैली में बहुत सामान्य है।
- अगर आप दो-तीन हफ्तों तक हर समय थकान महसूस करते हैं तो मनोचिकित्सक से परामर्श उचित होगा।
- दिन में कई बार चाय-कॉफी का सेवन करने वाले लोगों को थकान जल्दी होती है। कैफीन वाली चीजों के अधिक सेवन से ब्लड प्रेशर और धड़कन की गति तेज होती है जिससे थकान जल्दी होती है।
- गर्मियों में शरीर में पानी की कमी यानि डिहाइड्रेशन भी आपको जल्दी थका सकती है। इसलिए शरीर में पानी की कमी न होने दें।
- आजकल कंपनियों में रात की शिफ्ट या अलग-अलग शिफ्ट में काम करने का चलन बढ़ गया है। कई बार इससे बॉडी क्लॉक पर विपरीत प्रभाव पड़ता है और हर समय थकावट महसूस होती है। इससे बचाव के लिए दिन में सोने का एक नियत समय तय करें जिससे आपका शरीर अभ्यस्त हो सके और सोकर उठने के बाद आप तरोताजा महसूस करें।
- खान-पान और अपनी जीवनशैली पर ध्यान देने की खास जरूरत है। जरूरी नहीं कि हर बार थकान का कारण कोई शारीरिक समस्या हो, कई बार थकान का कारण मानसिक भी होता है।
सामान्य उपचार
थकान दूर भगाने का सबसे बेहतर उपाय होता है आराम करना। इसके साथ कुछ अन्य उपाय अपना कर भी आप थकान को दूर भगा सकते हैं। यह उपाय निम्न हैं:
थकान को कैसे भगाएं दूर (Treatment of Fatigue in Hindi)
- रात में अच्छी व भरपूर नींद लेना, थकान को दूर करने का सबसे अच्छा तरीका है। 7-8 घंटे की नींद जरूर लें ताकि अगले दिन के लिए आपको पर्याप्त ऊर्जा मिले।
- जब भी थकान महसूस हो तो 15-20 मिनट की झपकी जरूर लें। नींद पूरी न होने से वजन भी बढ़ता है और थकान भी जल्दी होती है।
- थकान अधिक होने पर हाथ पांव ढीले छोड़कर, आंखें बंद कर पलंग पर लेट जाइए। ऐसे में मांसपेशियों का तनाव दूर होता है।
- हँसी वास्तव में सबसे अच्छी दवा है। पुराने दोस्तों से मुलाकात करें, हास्य फिल्में देखें...कोई भी चीज़- जिससे आप खुलकर हँस सकें। जिन लोगों को प्यार करते हैं उनके साथ वक्त गुजारें।
- मन को अच्छा लगने वाला संगीत सुनें, इससे तनाव दूर होता है।
- दिन भर थोड़ा-थोड़ा पानी या कोई भी तरल पदार्थ पीते रहें। पानी शरीर से हानिकारक तत्वों को बाहर निकालकर शारीरिक प्रणाली में नई ऊर्जा भरता है। शर्बत, फलों का रस, छाछ व नारियल पानी आदि पीना चाहिए।
- दिन भर के सतत ऊर्जा प्रवाह के लिए बहुत सारी हरी सब्जियाँ खायें। खाने में फल, नट्स, अंडा और फिश भी शामिल करें।
- ज्यादा कॉफी और चाय न पियें, भले ही आपको उनसे राहत मिलती है। यह सिर्फ अस्थायी राहत होती है।
- सक्रिय रहें, आलस छोड़ें।
- नियमित कसरत करें।
थकावट के लिए घरेलू नुस्ख़े (Home Remedies For Fatigue)
थकावट-आलस्य से आप जिंदगी से निराश महसूस करते हैं। हमेशा गुस्से में हारे हुए इंसान की तरह व्यवहार करते है। आप भी चाहते हैं कि एक अच्छे नस्ल के घोड़े की तरह रेस लगाएं, लेकिन आपको महसूस होता है कि आपके पांव कीचड़ में फंसे हुए हैं। आप इच्छाशक्ति भी करते हैं लेकिन वो काम नहीं करता। मानसिक और शारीरिक थकावट वैसे तो सामान्य बीमारी है , मगर कुछ गंभीर बीमारी में भी ऐसे लक्षण दिखाई पड़ते हैं।
थकावट कई कारणों से होती है। मुख्य तौर पर खराब जीवनशैली, नींद में कमी, कुपोषण, फ्लू, मोटापा, एलर्जी, एनीमिया, अल्कोहल का सेवन, थायराइड, हार्ट की बीमारी समेत कैंसर, डायबिटीज और एडस जैसी गंभीर बीमारी में भी थकावट का अनुभव होता है।
थकावट का कोई खास चिकित्सकीय इलाज नहीं है बस आपको अपने जीवनशैली में थोड़ा बदलाव लाना होगा। खाने की आदत, पीने की आदत में बदलाव के साथ व्यायाम-योग और ध्यान को अपने जीवन का हिस्सा बनाना होगा। हमेशा सकारात्मक सोचना होगा।
थकावट को भगाने के क्विक घरेलू इलाज (Quick Home remedies for fatigue)
पिपरमिंट तेल के कुछ बूंदों को टिसू पेपर या रुमाल पर डालकर नाक के पास रखें और तेज सांस ले। काफी तरोताजा महसूस करेंगे। अगर आपके पास थोड़ा समय है तो नहाने के टब में कुछ बुंदे पिपरमिंट तेल के और कुछ बूंदे मेंहदी के तेल के डाल कर स्नान करें। काफी स्फूर्ति मिलेगी।
सुबह-शाम नियमित योग करें। खासकर पीठ के बल लेट कर पैर को सिर से उंचा करना और फिर उसे धीरे-धीरे नीचे करना। घुटनों को नाक में सटाना। ये कुछ ऐसे व्यायाम हैं जिससे आप तरोताजा महसूस करते हैं। योग में भ्रामरी भी काफी फायदेमंद रहता है।
सुबह बेहतर और पोषण से भरा नाश्ता करें और दिन भर में हल्का भोजन और शाम को हेल्दी स्नैक्स लेते रहें। यह दिन में दो टाइम भरपेट और भारी भोजन खाने से ज्यादा बेहतर है। प्रयास करें कि आप अपने भोजन के साइज को 300 कैलोरी पर लिमिट कर इसका रुटीन बना लें। इससे आपका ब्लड शुगर भी कंट्रोल में रहेगा और थकावट भी नहीं होगी।
भोजन में हमेशा हाइ-फाइबर वाले फूड्स ही खाएं। क्योंकि इसमें कंपलेक्स कार्बोहाइड्रेट की मात्रा ज्यादा पाई जाती है। जैसे कि समूचे-साबुत अनाज चावल और साबूत गेंहू की रोटी, दाल- दलिया और सब्जी-सलाद। इससे ब्लड शुगर भी कंट्रोल में रहता है और थकावट नहीं होती है।
अधिक वसा वाले भोजन खाना कम करें। इससे मोटापा बढ़ती है और शरीर में हमेशा थकावट महसूस होती है।
बिना छीले हुए आलू के स्लाइस काट कर इसे रात भर पानी में भींगने छोड़ दें। सुबह इस जूस को पी लें। इसमें काफी मात्रा में पोटाशियम रहती है जो शरीर में मिनरल्स की कमी को दूर करती है। मिनरल्स के सेवन से शरीर की मांसपेशिया काफी सक्रिय रहती है और आप थकावट नहीं महसूस करते हैं।
दिन में एक बार पालक खाना थकावट को भगाने की सबसे पुराना घरेलू भलाज है। पालक में पोटाशियम के साथ आइरन और विटामिन बी ग्रुप के कई विटामिन पाए जाते हैं, जो शरीर को उर्जा और स्फूर्ति देती है।
चैन की नींद सेहत के लिए सबसे जरुरी है। मानसिक और शारीरिक थकावट की सबसे बड़ी वजह नींद में कमी ही है। कम से कम एक एक मनुष्य को आठ घंटा बेहतर स्वास्थ्य के लिए सोना चाहिए। नींद में कमी है या गड़बड़ी है तो ध्यान-योग करें और हमेशा सकारात्मक सोचें। योग में एक आसन है- शवासन, उसे आजमाएं। काफी फायदा होगा।
सप्लीमेंट के तौर पर मानसिक औऱ शारीरिक थकावट को भगाने के लिए गिनसेंग, मैग्नीशियम और गिन्कगो भी ले सकते हैं।
थकावट से लड़ने के लिए 10 टॉप फूड्स (10 Top Foods to fight fatigue)
- केला
- ग्रीन टी
- सीताफल के बीज
- ओटमील
- योगर्ट
- तरबूज
- अखरोट
- लाल शिमला मिर्च
- हरी बींस
- पालक
घुटना शरीर का सबसे बड़ा तथा जटिल जोड़ है। यह एक सायनोवियल जोड़ (Sinovial Joint) का उदाहरण हैं। इस जोड़ में मुख्यत चार हड्डियों, लगभग 15 मांसपेशियों के अलावा एक और महत्त्वपूर्ण चीज़ होती है जिसे कारटीलेज (Cartilage) कहते हैं।
दैनिक जीवन में चलने-फिरने, चढ़ाव चढ़ने, सैर करने, व्यायाम करने, व्यायाम करने से घुटनों के जोड़ों में स्थित कारटीलेज का क्षय होता है|
कारटीलेज में द्रव या कोलोजन, रक्त प्रवाह के अभाव में कठोर होने लगता है।
घुटनों का दर्द (About Knee Pain in Hindi)
यह रोग पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में ज्यादा पाया जाता है। इसका कारण है महिलाओं में माहवारी बन्द होने पश्चात् स्त्री हारमोन ‘इस्ट्रोजन’ का स्राव काफी कम हो जाता है, जिससे शरीर का वजन बढ़ने व आस्टियोपोरोसिस व कार्टिलेज क्षरण की प्रक्रिया तेज हो जाती है।
घुटने का दर्द अस्थिरज्जु (Ligament) के फटने से भी होता है। हमारी रोजमर्रा की गतिविधियां जैसे चलना, दौड़ना, उछलना या सीढ़ियां चढ़ने से घुटने (Ghutne ka Dard) पर बहुत ज्यादा दबाव पड़ता है। हर दिन के दबाव से घुटने की अस्थिरज्जु में टूट-फूट हो जाती है, जिससे भी जोड़ों का दर्द होता है।
आमतौर पर देखा जाता है कि घुटने के हर दर्द को लोग आर्थराइटिस समझ लेते हैं, जबकि घुटनों में दर्द के कई कारण हो सकते हैं तथा उनका इलाज भी भिन्न-भिन्न है।
अर्थराइटिस एक ऐसी बीमारी है, जिसका शरीर के जोड़ों और मांसपेशियों पर असर पड़ता है। मरीज के पैरों और हड्डियों के जोड़ों में तेज दर्द होता है, जिससे चलने-फिरने में भी तकलीफ हो सकती है। कुछ खास तरह के अर्थराइटिस में शरीर के दूसरे अंग भी प्रभावित होते हैं। ऐसे में दर्द के साथ दूसरी समस्याएं भी हो सकती हैं।
घुटनों का दर्द के लक्षण
बढ़ती उम्र और मोटापे के कारण अकसर घुटनों के दर्द से दो-चार होना पड़ता है। घुटनों के दर्द के कुछ अन्य कारण (Causes of Knee Pain in Hindi) निम्न हैं:
- अर्थराइटिस- रीयूमेटाइड, आस्टियोअर्थराइटिस और गाउट सहित अथवा संबंधित ऊतक विकार
- बरसाइटिस- घुटने पर बार-बार दबाव से सूजन (जैसे लंबे समय के लिए घुटने के बल बैठना, घुटने का अधिक उपयोग करना अथवा घुटने में चोट)
- टेन्टीनाइटिस- आपके घुटने में सामने की ओर दर्द जो सीढ़ियों अथवा चढ़ाव पर चढ़ते और उतरते समय बढ़ जाता है। यह धावकों, स्कॉयर और साइकिल चलाने वालों को होता है।
- बेकर्स सिस्ट- घुटने के पीछे पानी से भरा सूजन जिसके साथ अर्थराइटिस जैसे अन्य कारणों से सूजन भी हो सकती है। यदि सिस्ट फट जाती है तो आपके घुटने के पीछे का दर्द नीचे आपकी पिंडली तक जा सकता है।
- घिसा हुआ कारटिलेज घुटने के जोड़ के अंदर की ओर अथवा बाहर की ओर दर्द पैदा कर सकता है।
- घिसा हुआ लिगामेंट (ए सी एल टियर)- घुटने में दर्द और अस्थायित्व उत्पन्न कर सकता है।
- नीकैप (Knee Cap) का विस्थापन।
- झटका लगना अथवा मोच- अचानक अथवा अप्राकृतिक ढंग से मुड़ जाने के कारण लिगामेंट में मामूली चोट।
- जोड़ में संक्रमण (इंफेक्शन)।
- घुटने की चोट- आपके घुटने में रक्त स्राव हो सकता है जिससे दर्द अधिक होता है |
- श्रोणि विकार (Pelvic Disorder)- यह दर्द उत्पन्न कर सकता है जो घुटने में महसूस होता है। उदाहरण के लिए इलियोटिबियल बैंड सिंड्रोम एक ऐसी चोट है जो आपके श्रोणि से आपके घुटने के बाहर तक जाती है।
- मोटापा, जिसके कारण घुटनों पर अधिक बोझ पड़ता है, जिससे घुटने का कार्टिलेज घिस जाता है। हड्डी के सिरों पर पड़ने वाला अधिक दबाव इस दर्द को और अधिक बढ़ा देता है।
सामान्य उपचार
घुटनों के दर्द से निजात पाने का सबसे बेहतर उपाय इससे बचना माना जाता है। डॉक्टरों के अनुसार स्वस्थ जीवनशैली और वजन को नियंत्रण में रखकर इस बीमारी से आसानी से बचा जा सकता है। घुटनों के दर्द से बचाव के कुछ अन्य उपाय निम्न हैं:
घुटनों के दर्द के उपाय (Treatment and Remedies of Knee Pain in Hindi)
- अपना वजन नियंत्रित रखें।
- स्विमिंग करना सबसे फायदेमंद है।
- दौड़ने से ज्यादा चलना अच्छा रहता है।
- जांघ की मांसपेशियों से संबंधित व्यायाम करें।
- फल व सब्जियों का भरपूर सेवन करें। इनमें एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में होते हैं।
- घुटनों को मोड़कर नहीं बैठना चाहिए। पेट को साफ रखें तथा कब्ज न होने दें।
- घुटनों के नीचे अथवा बीच में एक तकिया रखकर सोएं।
- दिन में कम से कम 2 बार बर्फ लगाएं।
- डॉक्टर से समय-समय पर जांच कराते रहें।
घुटने के दर्द के लिए घरेलू उपचार (Home Remedies For Knee Pain)
घुटनों के दर्द की सबसे बड़ी वजह है ओवरवेट होना। अगर आपके शरीर का वजन ज्यादा है तो जाहिर है आपका भार सहने में आपके घुटनों को तकलीफ होगी। इसके अलावा फिजिकल एक्टिविटी कम होने, कैल्शियम की कमी होने या अर्थराइटिस (arthritis) होने से भी घुटनों में दर्द रहता है। मांसपेशियों में तनाव रहने या किसी चोट की वजह से भी घुटनों का दर्द आपको परेशान कर सकता है।
आइए जानें कुछ घरेलू उपाय, जिन्हें अपनाकर आप घुटनों के दर्द से राहत पा सकते हैं।
1. ठंडा सेक (Cold fomentation)
घुटनों के दर्द से राहत के लिए ठंडा सेक दिया जा सकता है। यह सबसे आसान और प्रभावी तरीकों में से एक है। घुटनों को ठंडा सेक देने से यह रक्त वाहिकाओं को कसता है जिससे रक्त प्रवाह कम होता है और सूजन भी घटती है।
कैसे करें-
एक पतली तौलिया में बर्फ के टुकड़े लपेट लें। 10 से 20 मिनट के लिए दर्द प्रभावित घुटने के हिस्से को सेकें। आपका दर्द धीरे धीरे दूर हो जाएगा। इस उपाय को रोजाना दो या तीन बार कर सकते हैं।
2. सेब का सिरका (Apple cider vinegar)
सेब का सिरका भी घुटने के दर्द को कम करने में सहायक है। ये घुटने के जोड़ के भीतर खनिज इकठ्ठा करता है और हानिकारक विषाक्त पदार्थों को नष्ट करता है।
कैसे करें-
दो कप फ़िल्टर्ड पानी में दो चम्मच सेब का सिरका मिलाएं। दिनभर में यह घोल पीएं। पूरी तरह ठीक होने तक रोजाना इस टॉनिक का सेवन करें।
बाल्टी में गर्म पानी डालकर उसमें दो कप सेब का सिरका मिलाकर 30 मिनट के लिए पानी में प्रभावित घुटने भिगाकर बैठ जाएं। इससे घुटनों के दर्द में काफी राहत मिलेगी।
एक चम्मच सेब का सिरका और जैतून के तेल को बराबर भागों में मिलाकर घुटनों की मालिश करें, फायदा होगा।
3. लाल मिर्च (Red Chilli)
लाल मिर्च के इस्तेमाल से घुटनों के दर्द में भी राहत मिलती है, इसमें मौजूद केपसाइसिन दर्द निवारक की तरह काम करता है।
कैसे करें-
एक से डेढ़ कप तेल में दो बड़े चम्मच लाल मिर्च पाउडर डालकर एक पेस्ट तैयार करें। कम से कम एक सप्ताह तक हर दिन दो बार यह पेस्ट घुटनों पर लगाएं। घुटनों के दर्द से राहत मिलेगी।
एक कप सेब के सिरके में एक चौथाई या आधा चम्मच लाल मिर्च पाउडर डालकर मित्रण तैयार करें। इस मित्रण को घुटनों पर लगाने से दर्द और सूजन कम हो जाती है। जब तक घुटनों दर्द से राहत न हो तब तक हर दिन इस पेस्ट को 20 मिनट के लिए घुटनों पर लगा सकते हैं।
4. अदरक (Ginger)
घुटने का दर्द मांसपेशियों में तनाव की वजह से हो या गठिया के कारण, अदरक दोनों ही स्थिति में बेहद लाभप्रद है। इसमें एंटी़फ्लेमेबल गुण होते हैं जो घुटने की सूजन और दर्द को कम कर देते हैं।
कैसे करें-
एक कप पानी में थोड़ा सा अदरक का टुकड़ा लेकर 10 मिनट उबाल लें। इसके बाद इसको ठंडा करके इसमें थोड़ा सा नींबू का रस और शहद मिलाएं। इस घोल को रोज पीएं। आप चाहें तो अदरक के तेल से घुटनों की मालिश भी कर सकते हैं।
5. हल्दी (Haldi)
हल्दी घुटने के दर्द को दूर करने के लिए एक प्रभावी और प्राकृतिक उपचार है। हल्दी में मौजूद कुरक्यूमिन एंटीऑक्सीडेंट की तरह काम करता है और दर्द कम करने में मदद करता है।
कैसे करें-
एक कप पानी में अदरक और हल्दी को थोड़ा थोड़ा मिलाकर 10 मिनट के लिए इसे उबाल लें। इसके बाद इसको गुनगुना होने के बाद शहद मिलाएं। दिन में दो बार इसे पीएं।
एक गिलास दूध में हल्दी डालकर उबालें और उसमें शहद मिलाकर पीएं। इससे भी घुटनों का दर्द ठीक होता है।
नोट:
* हल्दी रक्त को पतला करती है, ऐसे में खून पतला (Blood Thinning) करने की दवा लेने वालों के लिए यह ठीक नहीं।
* शहद को बहुत गरम पानी या दूध में नहीं मिलाना चाहिए।
6. नींबू (Lemon)
नींबू भी गठिया की वजह से घुटने के दर्द के लिए एक घरेलू लाभकारी उपाय है। नींबू में पाया जाने वाला साइट्रिक एसिड (citric acid) गठिया में यूरिक एसिड क्रिस्टल को घुलाता है।
कैसे करें-
एक नींबू छोटे-छोटे टुकड़ों में काटें। इन टुकड़ों को सूती कपड़े में डालकर गर्म तिल के तेल में डुबाएं। इसके बाद पांच से 10 मिनट के लिए प्रभावित घुटने पर कपड़ा रखें। एक दिन में दो बार ऐसा करने से दर्द पूरी तरह चला जाता है।
एक गिलास पानी में नींबू निचाड़कर पीने से भी लाभ होता है।