Kendal Calling

  • Aromatherapy is a type of alternative medicine practice utilizing aromatic essential oils that are derived from a wide variety of healing plants!

  • "Aromatherapy can be performed in Herbs like rosemary, thyme, oregano or peppermint!"  - Seasick Steve

  • "Aromatherapy can be performed in Herbs like Leaves from eucalyptus plants"  - The Independent

  • "I loved Herbion Aromatherapies"  - Mark Chadwick, The Levellers

  • "Aromatherapy can be performed in Zest from fruits such as oranges, grapefruit or lemon!"  - Mr Scruff

  • "Aromatherapy can be performed in Wood or bark from trees including cedar or pine"  - Sunday Times

  • "Aromatherapy can be performed in Resin from frankincense trees!"  - The Charlatans

  • "Aromatherapy can be performed in Grasses, such as lemongrass!"  - Doves

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ज्वर (Fever)

ज्वर (Fever) (5)

स्वाइन फ्लू या H1N1 (H1N1 Flu) एक संक्रमण है, जो इन्फ्लूएंजा ए वायरस (Influenza Virus) के कारण होता है। आमतौर पर यह बीमारी सूअरों में होती है, इसलिए इसे स्वाइन फ्लू कहा जाता है, लेकिन कई बार सूअर के सीधे संपर्क में आने पर यह मनुष्य में भी फैल जाती है। यह बहुत जल्दी फैलने वाला रोग है। इससे बचने के लिए संक्रमित लोगों से दूर रहना चाहिए। 

 

भारत में स्वाइन फ्लू (Swine Flu in India)
स्वाइन फ्लू वर्ष 2009 में भी फैला था जिसके कारण देश भर कई लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। हालांकि, वर्ष 2015 में फैल रहा स्वाइन फ्लू का वायरस पिछली बार की तुलना में कम घातक है। स्वाइन फ्लू के वायरस से संक्रमित मरीज में लक्षण नजर आने से लेकर अगले सात दिनों तक इसका संक्रमण बना रहता है। साथ ही इससे जुड़ा एक तथ्य यह भी है कि स्वाइन फ्लू सर्दियों में अधिक प्रभावी होता है। 

स्वाइन फ्लू के लक्षण

 

 

माना जाता है कि स्वाइन फ्लू अधिकतर सूअरों के करीब रहने वाले लोगों में तेजी से फैलता है। हालांकि कई अन्य कारक भी है जो स्वाइन फ्लू के लिए जिम्मेदार हैं लेकिन इनमें से सबसे महत्वपूर्ण कारण है सूअरों का संपर्क। कुछ अन्य कारक निम्न हैं: 

स्वाइन फ्लू के कारण (Causes of Swine Flu)

  • संक्रमित सूअरों के साथ रहने वाले व्यक्ति स्वाइन फ्लू की चपेट में आ सकते हैं तथा आगे चलकर वे व्यक्ति अन्य लोगों को संक्रमित कर सकते हैं।
  • बीमारी के होने का खतरा बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और दिल, किडनी, डायबिटीज से ग्रस्त लोगों में अधिक रहता है। जिनकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता कम होती है, वे भी स्वाइन फ्लू का शिकार हो सकते हैं।
  • यहां यह ध्यान रखने वाली बात है कि सही तरह से पके हुए रेड मीट से स्वाइन फ्लू नहीं होता लेकिन अगर पकाने में असावधानी बरती जाए तो कुछ समस्याएं अवश्य आ सकती हैं। 

सामान्य उपचार

स्वाइन से बचाव का सबसे बेहतरीन तरीका है इससे बचकर रहना। संक्रमित रोगी से दूर रहकर इस बीमारी से आसानी से बचा जा सकता है। कुच अन्य उपाय निम्न हैं: 

स्वाइन फ्लू से बचाव (Prevention of Swine Flu in Hindi)

  • संक्रमित लोगों से दूर रहना ही इस बीमारी का बचाव है। 
  • साफ-सफाई का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। 
  • खांसते या छींकते समय रुमाल का प्रयोग करें। 
  • गंदे हाथों से आंख, नाक या मुंह छूने से बचें और बाहर खाने से परहेज करें। 
  • बीमार लोगों से नज़दीकी संपर्क रखने से बचें
  • अस्पताल या अन्य किसी सार्वजनिक स्थान पर जाने से पहले मास्क पहनें। 
  • संक्रमित व्यक्ति के पास जाना अगर जरूरी हो तो मास्क के साथ-साथ दस्ताने भी पहनें। इससे आप बीमारी से सुरक्षित रह सकते हैं।
  • स्वाइन फ्लू से बचने के लिए भारत में स्वाइन फ्लू वैक्सीन मौजूद है। स्वाइन फ्लू की वैक्सीन एक साल तक इस बीमारी से आपकी रक्षा करती है।
  • स्वाइन फ्लू के लक्षण नज़र आने पर मरीज को तुरन्त अस्पताल में भर्ती करा दें ताकि उसका सही इलाज हो सके।
  • यदि आप इन्फ़्लुएन्ज़ा से पीड़ित हों तो आप अन्य लोगों को संक्रमण से बचाने के लिए उनसे दूर रहें।
  • संक्रमित लोगों के संपर्क में रहने से आप बार-बार इस बीमारी के शिकार हो सकते हैं। 

चिकनगुनिया बुखार (Chikungunya) एक वायरस बुखार है जो एडीज मच्छर एइजिप्टी के काटने के कारण होता है। चिकनगुनिया और डेंगू के लक्षण लगभग एक समान होते हैं। इस बुखार का नाम चिकनगुनिया स्वाहिली भाषा से लिया गया है, जिसका अर्थ है ''ऐसा जो मुड़ जाता है'' और यह रोग से होने वाले जोड़ों के दर्द के लक्षणों के परिणामस्वरूप रोगी के झुके हुए शरीर को देखते हुए प्रचलित हुआ है।

 

चिकनगुनिया के लक्षण (Symptoms of Chikungunya)

चिकनगुनिया में जोड़ों के दर्द के साथ बुखार आता है और त्वचा खुश्क हो जाती है। चिकनगुनिया सीधे मनुष्य से मनुष्य में नहीं फैलता है। यह बुखार एक संक्रमित व्यक्ति को एडीज मच्छर के काटने के बाद स्वस्थ व्यक्ति को काटने से फैलता है। चिकनगुनिया से पीड़ित गर्भवती महिला को अपने बच्चे को रोग देने का जोखिम होता है।

चिकनगुनिया के लक्षण

 

चिकगुनिया के कारण (Causes of Chikungunya in Hindi)

चिकनगुनिया मुख्य रूप से मच्छरों के काटने के कारण ही होता है। इसके सामान्य कारण निम्न हैं: 

  • मच्छरों का पनपना।  
  • रहने के स्थान के आसपास गंदगी होना। 
  • पानी का जमाव। 

सामान्य उपचार

 

चिकनगुनिया होने पर डॉक्टर की सलाह लेना सबसे जरूरी है। साथ ही चिकनगुनिया से पीड़ित रोगी को निम्न उपाय अपनाने चाहिए: 

चिकनगुनिया का प्राथमिक उपचार (Treatment of Chikungunya in Hindi)

  • अधिक से अधिक पानी पीएं, हो सके तो गुनगुना पानी पीएं।
  • ज्यादा से ज्यादा आराम करें।
  • चिकनगुनिया के दौरान जोड़ों में बहुत दर्द होता है जिसके लिए डाॅक्टर की सलाह पर ही दर्द निवारक (Pain Killer) लें।
  • दूध से बने उत्पाद, दूध-दही या अन्य चीजों का सेवन करें।
  • रोगी को नीम के पत्तों को पीस कर उसका रस निकालकर दें।
  • रोगी के कपड़ों एवं उसके बिस्तर की साफ-सफाई पर खास ध्यान दें।
  • करेला व पपीता और गिलोय के पत्तों का रस काफी फायदेमंद माना जाता है। 
  • नारियल पानी पीने से शरीर में होने वाली पानी की कमी दूर होती है और लीवर को आराम मिलता है। 
  • ऐस्प्रिन बुखार होने पर कभी ना लें, इससे काफी समस्या हो सकती है। 

 

चिकनगुनिया में बच्चों की देखभाल (Chikungunya in Children)

  • बच्चों का खास ख्याल रखें। 
  • बच्चे नाजुक होते हैं और उनका इम्यून सिस्टम कमजोर होता है इसलिए बीमारी उन्हें जल्दी पकड़ लेती है। ऐसे में उनकी बीमारी को नजरअंदाज न करें।
  • बच्चे खुले में ज्यादा रहते हैं इसलिए इन्फेक्शन होने और मच्छरों से काटे जाने का खतरा उनमें ज्यादा होता है।
  • बच्चों घर से बाहर पूरे कपड़े पहनाकर भेजें। मच्छरों के मौसम में बच्चों को निकर व टी - शर्ट न पहनाएं। रात में मच्छर भगाने की क्रीम लगाएं।
  • अगर बच्चा बहुत ज्यादा रो रहा हो, लगातार सोए जा रहा हो, बेचैन हो, उसे तेज बुखार हो, शरीर पर रैशेज हों, उलटी हो या इनमें से कोई भी लक्षण हो तो फौरन डॉक्टर को दिखाएं।
  • आमतौर पर छोटे बच्चों को बुखार होने पर उनके हाथ - पांव तो ठंडे रहते हैं लेकिन माथा और पेट गर्म रहते हैं इसलिए उनके पेट को छूकर और रेक्टल टेम्प्रेचर लेकर उनका बुखार चेक किया जाता है। बगल से तापमान लेना सही तरीका नहीं है, खासकर बच्चों में। अगर बगल से तापमान लेना ही है तो जो रीडिंग आए, उसमें 1 डिग्री जोड़ दें। उसे ही सही रीडिंग माना जाएगा।

वायरल बुखार के लक्षण

  1. आँखें लाल होना
  2. इस बुखार में शरीर का ताप 101 डिग्री से 103 डिग्री या और ज्यादा भी हो जाता है
  3. खांसी और जुकाम होना
  4. जोड़ों में दर्द और सूजन होना
  5. थकान और गले में दर्द होना
  6. नाक बहना होना
  7. बदन दर्द होना
  8. भूख न लगना
  9. लेटने के बाद उठने में कमजोरी महसूस करना
  10. सिरदर्द होना

वायरल बुखार शरीर के कमज़ोर प्रतिरक्षा तंत्र (Immune System) की वजह से होता है। अगर शरीर की प्रतिरक्षण क्षमता या इम्यून सिस्टम मजबूत हो तो यह बीमारी जल्दी नहीं होती। 

सामान्य उपचार

वायरल बुखार का उपाय (Treatment of Viral Fever)

वायरल बुखार अकसर सामान्य बुखार ही लगता है इसलिए बुखार होने पर डॉक़्टर के पास जरूर जाना चाहिए ताकि यह पता चल सके कि वायरल बुखार है या नहीं। वायरल बुखार (Viral Fever) होने पर निम्न उपाय अपनाने चाहिए: 

बुखार अगर 102 डिग्री तक है और कोई और खतरनाक लक्षण नहीं हैं तो मरीज की देखभाल घर पर ही कर सकते हैं।

मरीज के शरीर पर सामान्य पानी की पट्टियां रखें। पट्टियां तब तक रखें, जब तक शरीर का तापमान कम न हो जाए। पट्टी रखने के बाद वह गरम हो जाती है इसलिए उसे सिर्फ 1 मिनट तक ही रखें।

अगर माथे के साथ - साथ शरीर भी गर्म है तो नॉर्मल पानी में कपड़ा भिगोकर निचोड़ें और उससे पूरे शरीर को पोंछें।

मरीज को हर छह घंटे में पैरासिटामॉल (Paracetamol) की एक गोली दे सकते हैं। दूसरी कोई गोली डॉक्टर से पूछे बिना न दें।

बच्चों को हर चार घंटे में 10 मिली प्रति किलो वजन के अनुसार दवा दे सकते हैं।

दो दिन तक बुखार ठीक न हो तो मरीज को डॉक्टर के पास जरूर ले जाएं।

साफ - सफाई का पूरा ख्याल रखें। मरीज को वायरल है, तो उससे थोड़ी दूरी बनाए रखें और रोगी के द्वारा इस्तेमाल की गई चीजें इस्तेमाल न करें।

मरीज को पूरा आराम करने दें, खासकर तेज बुखार में। आराम भी बुखार में इलाज का काम करता है।

मरीज छींकने से पहले नाक और मुंह पर रुमाल रखें। इससे वायरल होने पर दूसरों में फैलेगा नहीं।

वायरल फीवर में एंटीबॉयटिक दवाओं की कोई भूमिका नहीं होती। वायरल फीवर 5 से 7 दिनों में ठीक हो जाता है। 

इस रोग का इलाज लक्षणों के आधार पर किया जाता है, रोगी को पर्याप्त मात्रा में ग्लूकोज और इलेक्ट्रोलाइट लेना चाहिए।

वायरल बुखार के लिए घरेलू उपचार (Home Remedies For Viral Fever)

Home Remedies for Viral Fever

तापमान में अचानक परिवर्तन होने या संक्रमण का दौर होने पर अधिकतर लोग बुखार से पीड़ित होते हैं। ऐसा ही एक मौसमी संक्रमण वाला बुखार होता है वायरल बुखार (Viral Fever)। इस बुखार से निपटने के लिए कुछ एंटीबायोटिक दवाओं या कुछ ओटीसी (ओवर-द-काउंटर) का सहारा लिया जाता है। आप चिकित्सक के पास जाएं उससे पहले कुछ घरेलू नुस्खे आजमाकर भी बुखार को कम या इससे पूरी तरह आराम पाया जा सका है। वायरल बुखार के के लिए प्राकृतिक इलाज सुरक्षित और आसानी से उपलब्ध है। आइए आपको बताते वायरल बुखार के इलाज के लिए कुछ आसान घरेलू उपचार, जो कि निम्नलिखित हैं-

1. धनिया चाय (Coriander Tea)

धनिया के बीज में phytonutrients होते हैं जो कि शरीर को विटामिन देते हैं और अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली को भी बढ़ाते हैं। धनिया में मौजूद एंटीबायोटिक यौगिक वायरल संक्रमण से लड़ने की शक्ति देते हैं।

कैसे तैयार करें- एक गिलास पानी में एक बड़ा चम्म्च धनिया के बीच डालकर उबाल लें। इसके बाद इसमें थोड़ा दूध और चीनी मिलाएं। धनिया की चाय तैयार है, इसे पीने से वायरल बुखार में बहुत आराम मिलता है।

2. डिल बीज का काढ़ा (Brew of Dill seed)

प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने और शरीर को आराम देने के अलावा, डिल बीज शरीर के तापमान को कम करने में भी उपयोगी होते हैं। इसका कारण इनमें Flavonoids Osmond Pins उपस्थिति होते हैं। डिल बीज का काढ़ा वायरल बुखार में राहत देने के साथ ही शक्तिशाली रोगाणुरोधी एजेंट का कार्य करता है।

कैसे तैयार करें- एक कप उबलते पानी में डिल बीज डालें और उबलनें दें इसके बाद इसमें एक चुटकी दालचीनी डालें। गर्म चाय की तरह पिएं।

3. तुलसी के पत्ते का काढ़ा (Brew of Basil leaves)

वायरल बुखार के लक्षण होने पर प्राकृतिक उपचार के लिए सबसे प्रभावी और व्यापक रूप से इस्तेमाल की जाने वाली औषधि है तुलसी के पत्ते। बैक्टीरियल विरोधी, कीटाणुनाशक, जैविक विरोधी और कवकनाशी गुण तुलसी को वायरल बुखार के लिए सबसे उत्तम बनाते हैं। 

कैसे तैयार करें- आधे से एक चम्मच लौंग पाउडर को करीब 20 ताजा और साफ तुलसी के पत्तों के साथ एक लीटर पानी में डालकर उबाल लें। पानी को तब तक उबालें जब तक कि पानी घट कर आधा न रह जाए। इस काढ़े का हर दो घंटे में सेवन करें।

4. चावल स्टार्च (Rice starch)

वायरल बुखार के इलाज के लिए प्राचीन काल से आम घर उपाय है चावल स्टार्च (हिंदी में कांजी के रूप में जाना जाता है)। यह पारंपरिक उपाय प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ा देता है। यह विशेष रूप से वायरल बुखार से पीड़ित बच्चों और बड़े लोगों के लिए, एक प्राकृतिक पौष्टिक पेय के रूप में कार्य करता है।

कैसे तैयार करें- एक भाग चावल और आधा भाग पानी डालकर चावल के आधा पकने तक पकाएं। इसके बाद पानी को निथार कर अलग कर लें और इसमें स्वादानुसार नमक मिलाकर, गर्म गर्म ही पिएं। इससे वायरल बुखार में बहुत आराम मिलता है। 

5. सूखी अदरक मिश्रण (Dry ginger mixture)

अदरक स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी है। इसमें एंटी फ्लेमेबल, एंटीऑक्सिडेंट और वायरल बुखार के लक्षणों को कम करने के लिए Analgesic गुण होते हैं। इसलिए, वायरल बुखार से पीड़ित लोगों को परेशानी को दूर करने के लिए शहद के साथ सूखी अदरक का उपयोग करना चाहिए।

कैसे करें तैयार- एक कप पानी में दो मध्यम आकार के सूखे टुकड़े अदरक या सौंठ पाउडर को डालकर उबालें। दूसरे उबाल में अदरक के साथ थोड़ी हल्दी, काली मिर्च, चीनी आदि को उबालें। इसे दिन में चार बार थोड़ा थोड़ा पिएं। इससे वायरल बुखार में आराम मिलता है। 

6. मेथी का पानी (Fenugreek Water)

रसोई घर में आसानी से उपलब्ध, मेथी के बीज में डायेसजेनिन, सपोनिन्स और एल्कलॉइड जैसे औषधीय गुण शामिल है। मेथी के बीजों का प्रयोग अन्य बहुत सी बीमारियों के इलाज में भी किया जाता है और यह वायरल बुखार के लिए बेहतरीन औषधि है।

कैसे तैयार करें- आधा कप पानी में में एक बड़ा चमचा मेथी के बीच भिगोएँ। सुबह में, वायरल बुखार के इलाज के लिए नियमित अंतराल पर इस पेय को पिएं। कुछ और राहत के लिए मेथी के बीज, नींबू और शहद का एक मिश्रण तैयार कर उसका प्रयोग भी किया जा सकता है। 

नोट- ये केवल घरेलू उपचार हैं, और इन्हें चिकित्सा सलाह के स्थान पर प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए। यदि आपका बुखार नहीं उतर रहा है तो आपको डॉक्टरी सलाह लेनी चाहिए और उनके दिशा निर्देश का पालन करना 

 

      Typhoid बुखार का निदान / Diagnosis कैसे किया जाता हैं ?

      Typhoid बुखार का निदान करने के लिए, Typhoid बुखार के लक्षण पाये जानेवाले व्यक्तिओ में निम्नलिखित जांच किये जाते है :

     Typhidot Test : रोगी के रक्त का नमूना एक किट में डालकर जांच की जाती हैं। इसका परिणाम Positive आनेपर Typhoid बुखार का निदान किया जाता हैं। 

     Blood Culture : यह बिमारी के पहले हफ्ते में रक्त में Typhoid बुखार का बैक्टीरिया की मौजूदगी की जांच करने के लिए किया जाता हैं। 

     Stool Culture : यह रोगी व्यक्ति के मल में Typhoid बुखार का बैक्टीरिया की मौजूदगी की जांच करने के लिए किया जाता हैं।  

     WIDAL Test : इस जांच में रोगी व्यक्ति के रक्त की जांच की जाती हैं। इसमें O और H antigen में 180 से ज्यादा अनुपात आने पर Typhoid बुखार का निदान किया जाता हैं। 

     Sonography / Xray : पीड़ित व्यक्ति पेट को अधिक पेट दर्द और उलटी होने पर आंतो में अल्सर का निदान करने हेतु यह जांच की जाती हैं।  

     इनके अलावा भी रोगी के समस्या अनुसार अन्य जांच की जा सकती हैं। 

     Typhoid बुखार का ईलाज कैसे किया जाता हैं ?

    Typhoid बुखार का ईलाज करने के लिए Antibiotics का इस्तेमाल किया जाता हैं। 

    पहले के ज़माने लगभग 20% Typhoid बुखार के रोगियों की मृत्यु हो जाती थी परंतु अब ज्यादा असरदार Antibiotics का उपयोग करने के कारण सिर्फ 1 से 2% रोगियों की ही मृत्यु होती है और वह भी किसी बड़े complication के कारण होती हैं। 

    अगर पीड़ित व्यक्ति को ज्यादा कमजोरी नहीं है और आहार अच्छे से ले रहा है तो घर पर भी Antibiotics दवा लेकर Typhoid बुखार का ईलाज किया जा सकता हैं। कम से कम 2 हफ्तों तक Typhoid बुखार की दवा लेना होता हैं। 

    अधिक कमजोरी और उलटी, दस्त इत्यादि समस्या होने पर हॉस्पिटल में दाखिल होकर ईलाज कराना जरुरी होता हैं। 

    Typhoid बुखार के कारण आंतो में अल्सर होने पर जरुरत पड़ने पर operation भी किया जाता हैं। 

    Typhoid बुखार से बचने के लिए क्या एहतियात बरतने चाहिए ?

    Typhoid बुखार से बचने के लिए निम्नलिखित एहतियात बरतना चाहिए 

 

    Typhoid vaccine / लसीकरण : Typhoid बुखार से बचने के लिए दो तरह की vaccine उपलब्ध हैं। पहले तरह की Typhoid vaccine में injection दिया जाता है। यह vaccine 2 वर्ष से ऊपर के आयु के व्यक्तिओ में ही दी जाती हैं। दूसरी तरह की Typhoid vaccine       में 4 गोलिया दी जाती है जिसमे से एक गोली एक दिन छोड़कर (1, 3, 5, 7) खाना होता हैं। यह vaccine 6 वर्ष से ऊपर के व्यक्तिओ में ही दी जाती हैं। इन दोनों vaccine का असर 2 हफ्ते बाद होता है और Typhoid बुखार के खिलाफ कुछ प्रमाण में प्रतिरोध शक्ति का     निर्माण होता हैं। याद रहे की यह दोनों vaccine से 100% सुरक्षा की गारंटी नहीं मिलती हैं।  

    पानी : पिने के लिए हमेशा स्वच्छ पानी का उपयोग करे। अगर घर में RO नहीं है तो पानी को कम से कम 1 मिनिट उबाले और बाद में ठंडा होने के बाद में ही उपयोग करे। अगर कही बाहर सफ़र कर रहे है तो बोतलबंद पानी का उपयोग करे। घर में सब्जी / फल को साफ़     करने के लिए भी स्वच्छ पानी का ही इस्तेमाल करे। बाहर मिलने वाले बर्फ का इस्तेमाल न करे। 

    हात धोना : हमेशा खाना बनाने या खाने से पहले और बाथरूम के बाद अच्छे साबुन से हात धोना चाहिए।हात धोते समय साबुन से अच्छा झाग बनाकर १५ सेकंड तक बहते पानी में हात को अच्छी तरह से धोए और बाद में स्वच्छ कपडे से हात को अच्छी तरह से साफ़         करे। नल बंद करने के लिए उसी साफ कपडे का इस्तेमाल करे जिससे हात को दुबारा दूषण (Contamination) न हो। अगर पानी उपलब्ध नहीं है तो अपने साथ हात साफ़ रखने के लिए Hand sanitizer पास रखे। 

    आहार : घर में बना स्वच्छ, गर्म और पौष्टिक आहार लेना चाहिए। बाजार में और रस्ते पर बिकनेवाले आहार पदार्थो से परहेज करे। 

    रोगी : अगर आपको Typhoid बुखार हैं तो आपने हमेशा अपने हात साफ़ और स्वच्छ रखना चाहिए। आपके कपडे, चद्दर, तौलिया इत्यादि गर्म पानी और साबुन से धोना चाहिए। आपने अन्य खाद्य पदार्थो को नहीं छूना चाहिए और औरो के लिए खाना नहीं पकाना चाहिए।  

    Typhoid बुखार सबंधी उपयोगी जानकारी देने की कोशिश यहाँ पर की गयी हैं। अधिक जानकारी हेतु कृपया

    अपने डॉक्टर से संपर्क करे और उनके निर्देशों का पालन करे। 

 

Dengue Fever यह एक viral बीमारी है जो की Dengue virus के 4 प्रकारों में से किसी एक प्रकार के Dengue virus से होता है। जब कोई रोगी Dengue Fever से ठीक हो जाता है, तब उस मरीज को उस एक प्रकार के Dengue virus से लम्बे समय के लिए प्रतिरोध / immunity मिल जाती है परन्तु अन्य 3 प्रकार के Dengue virus से Dengue Fever दोबारा हो सकता है। दूसरी बार होने वाला Dengue Fever काफी गंभीर हो सकता है जिसे Dengue Hemorrhagic Fever कहते है।

Dengue Fever कैसे होता है ?

Dengue Fever हवा, पानी, साथ खाने से या छूने से नहीं फैलता है। Dengue Fever संक्रमित स्त्री / मादा जाती के Aedes aegypti  नामक मच्छर के काटने से होता है। अगर किसी व्यक्ति को Dengue Fever है और उस व्यक्ति को यह मच्छर काट कर उसका खून पिता है तो उस मच्छर में Dengue virus युक्त खून चला जाता है। जब यह संक्रमित मच्छर किसी स्वस्थ व्यक्ति को काट लेता है तो Dengue virus उस स्वस्थ व्यक्ति में चला जाता है।

 

Aedes aegypti  मच्छर की कुछ खास विशेषताए निचे दी गयी है :

 

    यह दिन में ज्यादा सक्रिय होते है। 

    इन मच्छर के शरीर पर चीते जैसी धारिया होती है। 

    ज्यादा ऊपर तक नहीं उड़ पाते है।

    ठन्डे और छाव वाले जगहों पर रहना ज्यादा पसंद करते है।  

    पर्दों के पीछे या अँधेरे वाली जगह पर रहते है। 

    घर के अन्दर रखे हुए शांत पानी में प्रजनन / breeding करते है। 

    अपने प्रजनन क्षेत्र के 200 meter की दुरी के अन्दर ही उड़ते है। 

    गटर या रस्ते पर जमा खराब पानी में कम प्रजनन करते है।  

    पानी सुख जाने के बाद भी इनके अंडे 12 महीनो तक जीवित रह सकते है। 

 

Dengue Fever के लक्षण क्या है ?

 

संक्रमित मच्छर के काटने के 3 से 14 दिनों बाद Dengue Fever के लक्षण दिखने शुरू होते है। Dengue Fever के लक्षण निचे दिए गए है :

 

    तेज ठंडी लगकर बुखार आना 

    सरदर्द 

    आँखों में दर्द 

    बदनदर्द / जोड़ो में दर्द 

    भूक कम लगना 

    जी मचलाना, उलटी 

    दस्त लगना 

    चमड़ी के निचे लाल चट्टे आना 

    Dengue Hemorrhagic Fever की गंभीर स्तिथि में आँख, नाक में से खून भी निकल सकता है  

 

Dengue Fever का इलाज क्या है ?

 

    Dengue Fever का रोकथाम / Prevention ही इसका सबसे अच्छा  और बेहतर ईलाज है। 

    Dengue Fever की कोई विशेष दवा या vaccine नहीं है। 

    एक viral रोग होने के कारण इसकी दवा निर्माण करना बेहद कठिन कार्य है। 

    Dengue Fever के इलाज / चिकित्सा में लाक्षणिक चिकित्सा / symptomatic treatment की जाती है। 

    Dengue Fever की कोई दवा नहीं है पर इस रोग से शरीर पर होने वाले side-effects से बचने के लिए रोगी को डॉक्टर की सलाह अनुसार आराम करना चाहिए और समय पर दवा लेना चाहिए। 

    रोगी को पर्याप्त मात्रा में आहार और पानी लेना चाहिए। बुखार के लिए डॉक्टर की सलाह अनुसार paracetamol लेना चाहिए। डेंगू बुखार में रोगी ने पर्याप्त मात्रा में पानी पीना सबसे ज्यादा आवश्यक हैं। 

    बुखार या सरदर्द के लिए Aspirin / Brufen का उपयोग न करे।  

    डॉक्टर की सलाह अनुसार नियमित Platelet count की जाँच करना चाहिए। 

    हमारी रोगप्रतिकार शक्ति Dengue Fever से लड़ने में सक्षम होती है, इसलिए हमें हमेशा योग्य संतुलित आहार और व्यायाम द्वारा रोग प्रतिकार शक्ति को बढाने की कोशिश करनी चाहिए। 

 

Dengue Fever के बचाव के उपाय क्या है ?

 

जैसे की मैंने पहले भी लिखा है, Dengue Fever का रोकथाम / Prevention ही इसका सबसे बेहतर ईलाज है। 

Dengue Fever के बचाव के उपाय निचे दिए गए है :

 

    घर के अन्दर और आस-पास पानी जमा न होने दे। कोई भी बर्तन में खुले में पानी न जमने दे। 

    बर्तन को खाली कर रखे या उसे उलटा कर कर रख दे। 

    अगर आप किसी बर्तन, ड्रम या बाल्टी में पानी जमा कर रखते है तो उसे ढक कर रखे। 

    अगर किसी चीज में हमेशा पानी जमा कर रखते है तो पहले उसे साबुन और पानी से अच्छे से धो लेना चाहिए, जिससे मच्छर के अंडे को हटाया जा सके।  

    घर में कीटनाशक का छिडकाव करे। 

    कूलर का काम न होने पर उसमे जमा पानी निकालकर सुखा कर दे। जरुरत होने पर कूलर का पानी रोज नियमित बदलते रहे। 

    किसी भी खुली जगह में जैसे की गड्डो में, गमले में या कचरे में पानी जमा न होने दे। अगर पानी जमा है तो उसमे मिटटी डाल दे। 

    खिड़की और दरवाजे में जाली लगाकर रखे। शाम होने से पहले दरवाजे बंद कर दे। 

    ऐसे कपडे पहने जो पुरे शरीर को ढक सके। 

    रात को सोते वक्त मच्छरदानी लगाकर सोए। 

    अन्य मच्छर विरोधी उपकरणों का इस्तेमाल करे जैसे की electric mosquito bat, repellent cream, sprays etc. 

    अगर बच्चे खुले में खेलने जाते है तो उने शरीर पर mosquito repellent cream लगाए और पुर शरीर ढके ऐसे कपडे पहनाए। 

    अपने आस-पास के लोगो को भी मच्छर को फैलने से रोकने के लिए प्रोत्साहित करे। 

    अपने आस-पास में अगर कोई Dengue Fever या Malaria के मरीज का पता चलता है तो इसकी जानकारी स्वास्थय विभाग एवं नगर निगम को दे, जिससे तुरंत मच्छर विरोधी उपाय योजना की जा सके।  

    Dengue Fever के ज्यादातर मरीजो की मृत्यु platelet या खून के अभाव में होती है। मेरी आप सभी से request है की जरुरत के समय रक्तदान / Blood Donation करने से बिलकुल न घबराए और साल में कम से कम दो बार Blood Donation जरुर करे। 

    कई लोग Dengue Fever में Platelet Count बढाने के लिए पपीते के पत्ते का रस पिने के सलाह देते है। पपीते के पत्ते का रस पिने के बाद कई मरीजो में platelet count में सुधार होते हुए देखा गया है। इसका कोई ठोस पुरावा नहीं है और न कोई research हुआ है। अब बाजार में पपीते के extract की दवा भी मिलती है जो की डॉक्टर जरुरत होने पर आपको लेने की सलाह दे सकते हैं।