Kendal Calling

  • Aromatherapy is a type of alternative medicine practice utilizing aromatic essential oils that are derived from a wide variety of healing plants!

  • "Aromatherapy can be performed in Herbs like rosemary, thyme, oregano or peppermint!"  - Seasick Steve

  • "Aromatherapy can be performed in Herbs like Leaves from eucalyptus plants"  - The Independent

  • "I loved Herbion Aromatherapies"  - Mark Chadwick, The Levellers

  • "Aromatherapy can be performed in Zest from fruits such as oranges, grapefruit or lemon!"  - Mr Scruff

  • "Aromatherapy can be performed in Wood or bark from trees including cedar or pine"  - Sunday Times

  • "Aromatherapy can be performed in Resin from frankincense trees!"  - The Charlatans

  • "Aromatherapy can be performed in Grasses, such as lemongrass!"  - Doves

BMS Research Lab In Beautiful Country India
New Year 2018
Look Products
हड्डी जोड़ एवं मांस पेशियाँ (Bone Joint and Muscles)

हड्डी जोड़ एवं मांस पेशियाँ (Bone Joint and Muscles) (3)

सीने में दर्द ( Chest Pain) की बात आते ही हम दिल के दौरे (Heart Attack) की बात सोचने लगते हैं, मगर सीने में दर्द कई कारणों से हो सकता है। फेफड़े, मांसपेशियाँ, पसली, या नसों में भी कोई समस्या उत्पन्न होने पर सीने में दर्द होता है। किसी-किसी परिस्थिति में यह दर्द भयानक रूप धारण कर लेता है जो मृत्यु तक का कारण बन जाता है। लेकिन एक बात ध्यान में रखें कि खुद ही रोग की पहचान न करें और सीने में दर्द को नजरअंदाज न करें, तुरन्त चिकित्सक के पास जायें।

सीने में दर्द के लक्षण

 

एनजाइना (Angina) : हृदय (Heart) के कारण जब सीने में दर्द होता है तब चिकित्सा शास्त्र के अनुसार इसको एनजाइना कहते हैं। एनजाइना से ग्रस्त रोगी को सीने में दर्द कुछ ही देर तक होता है या परिस्थिति बिगड़ जाने पर दर्द की अवधि बढ़ जाती है। साधारणतः यह दर्द कंधे, बाँह, पीठ, पेट के ऊपरी भाग में होता है। एनजाइना में धमनियों के सिकुड़ जाने के कारण रक्त का हृदय में आवागमन बाधित हो जाता है। जब धमनियों में रक्त का थक्का जमने लगता है तब साँस लेने में मुश्किल होने लगती है और सीने में दर्द शुरू हो जाता है। अगर परिस्थिति को संभाला नहीं गया तो मृत्यु तक हो सकती है। एनजाइना का दर्द साधारणतः आनुवंशिकता के कारण, मधुमेह, हाई कोलेस्ट्रॉल, पहले से हृदय संबंधित रोग से ग्रस्त होने के कारण होता है।

उच्च रक्तचाप: जो धमनियाँ रक्त को फेफड़ों तक ले जाती है उसमें जब रक्त का चाप बढ़ जाता है तब सीने में दर्द होता है और इस अवस्था को उच्च रक्तचाप (Pulmonary Hypertension) कहते हैं।

एसिडिटी (Acidity): यह साधारणत गैस्ट्रो इसोफेगल रिफ्ल्क्स डिज़ीज़ (गर्ड) (भाटा रोग) के कारण होता है।

फेफड़ों में रोग (Lung Disease) : जब रक्त धमनियों में थक्का जमने लगता है तब फेफड़ों के टिशु या ऊतकों में रक्त का प्रवाह रुकने लगता है, ऐसा होने से बेचैनी होने लगती है और साँस लेने में मुश्किल होता है, जो बाद में दर्द का कारण बनता है।

डर के कारण (Fear Psycosis): कभी-कभी दिल में दर्द अत्यधिक डर, अचानक कोई सदमा, दिल की धड़कन के बढ़ने, अत्यधिक पसीना और साँस में तकलीफ के कारण भी होता है।

तनाव: तनाव के कारण दिल की धड़कन तेज हो जाती है, साँस लेने में तकलीफ होने लगती है और रक्त चाप बढ़ जाने के कारण भी हृदय में रक्त संचार की गति को नुकसान पहुँचता है, इन सब कारणों से भी सीने में दर्द होता है।

सामान्य उपचार

  • सीने में दर्द (Chest Pain) का सीधा संबंध हमारे अनियोजित और अस्वस्थ खान-पान से है। खान पान में सुधार के साथ साथ हमें नियमित रूप से व्यायाम करना चाहिए।
  • जो व्यायाम शरीर के लिए उपयुक्त हो उस व्यायाम को जरूर करें, जैसे- तेज कदमों से चलना, सीढ़ियाँ चढ़ना, बैडमिंटन या टेनिस खेलना आदि।
  • आहार में फाइबर की मात्रा को बढ़ाएं और कैलोरी की मात्रा को कम करें।
  • खाने में नमक की मात्रा को कम करें और अगर हो सके तो बिलकुल छोड़ दें।
  • धूम्रपान हृदय संबंधी बीमारी को बढ़ाने में अहम् भूमिका निभाता है। अतः इसको छोड़ना फायदेमंद है।

 

घुटना शरीर का सबसे बड़ा तथा जटिल जोड़ है। यह एक सायनोवियल जोड़ (Sinovial Joint) का उदाहरण हैं। इस जोड़ में मुख्यत चार हड्डियों, लगभग 15 मांसपेशियों के अलावा एक और महत्त्वपूर्ण चीज़ होती है जिसे कारटीलेज (Cartilage) कहते हैं। 

दैनिक जीवन में चलने-फिरने, चढ़ाव चढ़ने, सैर करने, व्यायाम करने, व्यायाम करने से घुटनों के जोड़ों में स्थित कारटीलेज का क्षय होता है|
कारटीलेज में द्रव या कोलोजन, रक्त प्रवाह के अभाव में कठोर होने लगता है।

 

घुटनों का दर्द (About Knee Pain in Hindi)

यह रोग पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में ज्यादा पाया जाता है। इसका कारण है महिलाओं में माहवारी बन्द होने पश्चात् स्त्री हारमोन ‘इस्ट्रोजन’ का स्राव काफी कम हो जाता है, जिससे शरीर का वजन बढ़ने व आस्टियोपोरोसिस व कार्टिलेज क्षरण की प्रक्रिया तेज हो जाती है।

घुटने का दर्द अस्थिरज्जु (Ligament) के फटने से भी होता है। हमारी रोजमर्रा की गतिविधियां जैसे चलना, दौड़ना, उछलना या सीढ़ियां चढ़ने से घुटने (Ghutne ka Dard) पर बहुत ज्यादा दबाव पड़ता है। हर दिन के दबाव से घुटने की अस्थिरज्जु में टूट-फूट हो जाती है, जिससे भी जोड़ों का दर्द  होता है।

आमतौर पर देखा जाता है कि घुटने के हर दर्द को लोग आर्थराइटिस समझ लेते हैं, जबकि घुटनों में दर्द के कई कारण हो सकते हैं तथा उनका इलाज भी भिन्न-भिन्न है।

अर्थराइटिस एक ऐसी बीमारी है, जिसका शरीर के जोड़ों और मांसपेशियों पर असर पड़ता है। मरीज के पैरों और हड्डियों के जोड़ों में तेज दर्द होता है, जिससे चलने-फिरने में भी तकलीफ हो सकती है। कुछ खास तरह के अर्थराइटिस में शरीर के दूसरे अंग भी प्रभावित होते हैं। ऐसे में दर्द के साथ दूसरी समस्याएं भी हो सकती हैं।

घुटनों का दर्द के लक्षण

 

बढ़ती उम्र और मोटापे के कारण अकसर घुटनों के दर्द से दो-चार होना पड़ता है। घुटनों के दर्द के कुछ अन्य कारण (Causes of Knee Pain in Hindi) निम्न हैं: 

  • अर्थराइटिस- रीयूमेटाइड, आस्टियोअर्थराइटिस और गाउट सहित अथवा संबंधित ऊतक विकार
  • बरसाइटिस- घुटने पर बार-बार दबाव से सूजन (जैसे लंबे समय के लिए घुटने के बल बैठना, घुटने का अधिक उपयोग करना अथवा घुटने में चोट)
  • टेन्टीनाइटिस- आपके घुटने में सामने की ओर दर्द जो सीढ़ियों अथवा चढ़ाव पर चढ़ते और उतरते समय बढ़ जाता है। यह धावकों, स्कॉयर और साइकिल चलाने वालों को होता है।
  • बेकर्स सिस्ट- घुटने के पीछे पानी से भरा सूजन जिसके साथ अर्थराइटिस जैसे अन्य कारणों से सूजन भी हो सकती है। यदि सिस्ट फट जाती है तो आपके घुटने के पीछे का दर्द नीचे आपकी पिंडली तक जा सकता है।
  • घिसा हुआ कारटिलेज घुटने के जोड़ के अंदर की ओर अथवा बाहर की ओर दर्द पैदा कर सकता है। 
  • घिसा हुआ लिगामेंट (ए सी एल टियर)- घुटने में दर्द और अस्थायित्व उत्पन्न कर सकता है।
  • नीकैप (Knee Cap) का विस्थापन। 
  • झटका लगना अथवा मोच- अचानक अथवा अप्राकृतिक ढंग से मुड़ जाने के कारण लिगामेंट में मामूली चोट। 
  • जोड़ में संक्रमण (इंफेक्शन)। 
  • घुटने की चोट- आपके घुटने में रक्त स्राव हो सकता है जिससे दर्द अधिक होता है |
  • श्रोणि विकार (Pelvic Disorder)- यह दर्द उत्पन्न कर सकता है जो घुटने में महसूस होता है। उदाहरण के लिए इलियोटिबियल बैंड सिंड्रोम एक ऐसी चोट है जो आपके श्रोणि से आपके घुटने के बाहर तक जाती है।
  • मोटापा, जिसके कारण घुटनों पर अधिक बोझ पड़ता है, जिससे घुटने का कार्टिलेज घिस जाता है। हड्डी के सिरों पर पड़ने वाला अधिक दबाव इस दर्द को और अधिक बढ़ा देता है।

सामान्य उपचार

घुटनों के दर्द से निजात पाने का सबसे बेहतर उपाय इससे बचना माना जाता है। डॉक्टरों के अनुसार स्वस्थ जीवनशैली और वजन को नियंत्रण में रखकर इस बीमारी से आसानी से बचा जा सकता है। घुटनों के दर्द से बचाव के कुछ अन्य उपाय निम्न हैं: 

घुटनों के दर्द के उपाय (Treatment and Remedies of Knee Pain in Hindi)

  • अपना वजन नियंत्रित रखें। 
  • स्विमिंग करना सबसे फायदेमंद है। 
  • दौड़ने से ज्यादा चलना अच्छा रहता है। 
  • जांघ की मांसपेशियों से संबंधित व्यायाम करें।
  • फल व सब्जियों का भरपूर सेवन करें। इनमें एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में होते हैं। 
  • घुटनों को मोड़कर नहीं बैठना चाहिए।  पेट को साफ रखें तथा कब्ज न होने दें। 
  • घुटनों के नीचे अथवा बीच में एक तकिया रखकर सोएं।
  • दिन में कम से कम 2 बार बर्फ लगाएं।
  • डॉक्टर से समय-समय पर जांच कराते रहें। 

घुटने के दर्द के लिए घरेलू उपचार (Home Remedies For Knee Pain)

घुटनों के दर्द की सबसे बड़ी वजह है ओवरवेट होना। अगर आपके शरीर का वजन ज्यादा है तो जाहिर है आपका भार सहने में आपके घुटनों को तकलीफ होगी। इसके अलावा फिजिकल एक्टिविटी कम होने, कैल्शियम की कमी होने या अर्थराइटिस (arthritis) होने से भी घुटनों में दर्द रहता है। मांसपेशियों में तनाव रहने या किसी चोट की वजह से भी घुटनों का दर्द आपको परेशान कर सकता है। 
आइए जानें कुछ घरेलू उपाय, जिन्हें अपनाकर आप घुटनों के दर्द से राहत पा सकते हैं।

1. ठंडा सेक (Cold fomentation)
घुटनों के दर्द से राहत के लिए ठंडा सेक दिया जा सकता है। यह सबसे आसान और प्रभावी तरीकों में से एक है। घुटनों को ठंडा सेक देने से यह रक्त वाहिकाओं को कसता है जिससे रक्त प्रवाह कम होता है और सूजन भी घटती है। 

कैसे करें-
एक पतली तौलिया में बर्फ के टुकड़े लपेट लें। 10 से 20 मिनट के लिए दर्द प्रभावित घुटने के हिस्से को सेकें। आपका दर्द धीरे धीरे दूर हो जाएगा। इस उपाय को रोजाना दो या तीन बार कर सकते हैं।

2. सेब का सिरका (Apple cider vinegar)
सेब का सिरका भी घुटने के दर्द को कम करने में सहायक है। ये घुटने के जोड़ के भीतर खनिज इकठ्ठा करता है और हानिकारक विषाक्त पदार्थों को नष्ट करता है।

कैसे करें- 
दो कप फ़िल्टर्ड पानी में दो चम्मच सेब का सिरका मिलाएं। दिनभर में यह घोल पीएं। पूरी तरह ठीक होने तक रोजाना इस टॉनिक का सेवन करें।

बाल्टी में गर्म पानी डालकर उसमें दो कप सेब का सिरका मिलाकर 30 मिनट के लिए पानी में प्रभावित घुटने भिगाकर बैठ जाएं। इससे घुटनों के दर्द में काफी राहत मिलेगी।

एक चम्मच सेब का सिरका और जैतून के तेल को बराबर भागों में मिलाकर घुटनों की मालिश करें, फायदा होगा।

3. लाल मिर्च (Red Chilli)
लाल मिर्च के इस्तेमाल से घुटनों के दर्द में भी राहत मिलती है, इसमें मौजूद केपसाइसिन दर्द निवारक की तरह काम करता है।

कैसे करें- 
एक से डेढ़ कप तेल में दो बड़े चम्मच लाल मिर्च पाउडर डालकर एक पेस्ट तैयार करें। कम से कम एक सप्ताह तक हर दिन दो बार यह पेस्ट घुटनों पर लगाएं। घुटनों के दर्द से राहत मिलेगी।

एक कप सेब के सिरके में एक चौथाई या आधा चम्मच लाल मिर्च पाउडर डालकर मित्रण तैयार करें। इस मित्रण को घुटनों पर लगाने से दर्द और सूजन कम हो जाती है। जब तक घुटनों दर्द से राहत न हो तब तक हर दिन इस पेस्ट को 20 मिनट के लिए घुटनों पर लगा सकते हैं। 

4. अदरक (Ginger)

घुटने का दर्द मांसपेशियों में तनाव की वजह से हो या गठिया के कारण, अदरक दोनों ही स्थिति में बेहद लाभप्रद है। इसमें एंटी़फ्लेमेबल गुण होते हैं जो घुटने की सूजन और दर्द को कम कर देते हैं।

कैसे करें-
एक कप पानी में थोड़ा सा अदरक का टुकड़ा लेकर 10 मिनट उबाल लें। इसके बाद इसको ठंडा करके इसमें थोड़ा सा नींबू का रस और शहद मिलाएं। इस घोल को रोज पीएं। आप चाहें तो अदरक के तेल से घुटनों की मालिश भी कर सकते हैं। 

5. हल्दी (Haldi)
हल्दी घुटने के दर्द को दूर करने के लिए एक प्रभावी और प्राकृतिक उपचार है। हल्दी में मौजूद कुरक्यूमिन एंटीऑक्सीडेंट की तरह काम करता है और दर्द कम करने में मदद करता है।

कैसे करें-
एक कप पानी में अदरक और हल्दी को थोड़ा थोड़ा मिलाकर 10 मिनट के लिए इसे उबाल लें। इसके बाद इसको गुनगुना होने के बाद शहद मिलाएं। दिन में दो बार इसे पीएं।
एक गिलास दूध में हल्दी डालकर उबालें और उसमें शहद मिलाकर पीएं। इससे भी घुटनों का दर्द ठीक होता है।

नोट: 
* हल्दी रक्त को पतला करती है, ऐसे में खून पतला (Blood Thinning) करने की दवा लेने वालों के लिए यह ठीक नहीं।
* शहद को बहुत गरम पानी या दूध में नहीं मिलाना चाहिए।

6. नींबू (Lemon)
नींबू भी गठिया की वजह से घुटने के दर्द के लिए एक घरेलू लाभकारी उपाय है। नींबू में पाया जाने वाला साइट्रिक एसिड (citric acid) गठिया में यूरिक एसिड क्रिस्टल को घुलाता है।

कैसे करें-
एक नींबू छोटे-छोटे टुकड़ों में काटें। इन टुकड़ों को सूती कपड़े में डालकर गर्म तिल के तेल में डुबाएं। इसके बाद पांच से 10 मिनट के लिए प्रभावित घुटने पर कपड़ा रखें। एक दिन में दो बार ऐसा करने से दर्द पूरी तरह चला जाता है।
एक गिलास पानी में नींबू निचाड़कर पीने से भी लाभ होता है।

Wednesday, 23 November 2016 09:34

कमर दर्द (Back Pain)

Written by

स्लिप डिस्क या कमर दर्द (Back Pain) कोई बीमारी नहीं है बल्कि यह एक तरह से शरीर की यांत्रिक असफलता (Mechanical Failure) है। कमर दर्द के सबसे महत्त्वपूर्ण कारण रीढ़ से या मेरुदंड (Spinal Cord) से जुड़े होते हैं स्पाइनल कॉर्ड या रीढ़ की हड्डी स्पाइन वर्टिब्रा (Vertebrae) से मिलकर बनती है जिस पर शरीर का पूरा वजन टिका होता है। यह सिर के निचले हिस्से से शुरू होकर टेल बोन (Tail Bone) तक होती है। हमारी रीढ़ की हड्डी में हर दो वर्टिब्रा (Vertebrae) के बीच में एक डिस्क होती है जो झटका सहने का यानि शाक एब्जार्वर (Shock Absorber) का काम करती है। आगे-पीछे, दायें-बायें घूमने से डिस्क का फैलाव होता है। गलत तरीके से काम करने, पढ़ने, उठने-बैठने या झुकने से डिस्क पर लगातार जोर पड़ता है।

इससे मेरुदंड की नसों (Nerves) पर दबाव आ जाता है जो कमर में लगातार होने वाले दर्द का कारण बनता है। इस डिस्क के घिस जाने से इसमें सूजन आ जाती है, और यह उभरकर बाहर निकल आती है। इसके बाद यह रीढ़ की हड्डी से पैरों तक जाने वाली नसों पर दबाव डालती है। नसें दबने के कारण यह दर्द पैरों तक भी जा सकता है। इसमें पैर सुन्न हो जाने का खतरा रहता है। दर्द इतना कष्टदायक होता है कि मरीज अपने दैनिक कार्य करने तक में असमर्थ हो जाता है। कमर दर्द ( Peeth Ka Dard) अब लोगों के लिए एक कष्टदायक समस्या बनी हुई है। आज हर उम्र के लोग इससे परेशान हैं और दुनिया भर में इसके सरल व सहज इलाज की खोज जारी है। दिनभर बैठे कर काम करने से यह समस्या और भी बढ़ जाती है। कमर दर्द अगर नीचे की तरफ बढ़ने लगे और तेज हो जाए, तो जल्द से जल्द डॉक्टर को दिखाएं। कभी-कभी दर्द कुछ मिनट ही होता है और कभी-कभी यह घंटों तक रहता है। 30 से 50 वर्ष की आयुवर्ग के लोग इसकी चपेट में अधिक आते हैं। वे महिला और पुरुष इसके अधिक शिकार होते हैं, जिन्हें अपने काम की वजह से बार-बार उठना, बैठना, झुकना या सामान उतारना, रखना होता है।

कमर दर्द के लक्षण

 

स्लिप डिस्क या कमर दर्द (Back Pain) होने के के कुछ प्रमुख कारण 

  • गलत पोश्चर (Posture),
  • लेटकर या झुककर पढ़ना या काम करना,
  • कंप्यूटर के आगे बैठे रहना,
  • अचानक झुकना,
  • वजन उठाना,
  • झटका लगना,
  • गलत तरीके से उठना-बैठना,
  • अनियमित दिनचर्या,
  • सुस्त जीवनशैली,
  • शारीरिक गतिविधियां कम होना,
  • गिरना,
  • फिसलना,
  • दुर्घटना में चोट लगना,
  • देर तक ड्राइविंग करना,
  • उम्र बढने के साथ-साथ हड्डियां कमजोर होने लगती हैं और इससे डिस्क पर जोर पड़ने लगता है,
  • कमर की हड्डियों या रीढ़ की हड्डी में जन्मजात विकृति या संक्रमण,
  • पैरों में कोई जन्मजात खराबी या बाद में कोई विकार पैदा होना।

सामान्य उपचार

 

  • कमर दर्द के ज्यादातर मरीजों को आराम करने और फिजियोथेरेपी से राहत मिल जाती है।
  • स्लिप डिस्क या कमर दर्द की समस्या होने पर दो से तीन हफ्ते तक पूरा आराम करना चाहिए।
  • दर्द कम करने के लिए डॉक्टर की सलाह पर दर्द-निवारक दवाएं, मांसपेशियों को आराम पहुंचाने वाली दवाएं लें।
  • जीवनशैली बदलें।
  • वजन नियंत्रित रखें। वजन बढ़ने और खासतौर पर पेट के आसपास चर्बी बढ़ने से रीढ़ की हड्डी पर सीधा प्रभाव पड़ता है।
  • नियमित रूप से पैदल चलें। यह सर्वोत्तम व्यायाम है।
  • शारीरिक श्रम से जी न चुराएं। शारीरिक श्रम से मांसपेशियाँ मजबूत होती हैं।
  • अधिक समय तक स्टूल या कुर्सी पर झुककर न बैठें। कुर्सी पर बैठते समय पैर सीधे रखें न कि एक पर एक चढ़ाकर।
  • अचानक झटके के साथ न उठें-बैठें। एक सी मुद्रा में न तो अधिक देर तक बैठे रहें और न ही खड़े रहें।
  • किसी भी सामान को उठाने या रखने में जल्दबाजी न करें। भारी सामान को उठाकर रखने की बजाय धकेल कर रखना चाहिए। जमीन से कोई सामान उठाना हो तो झुकें नहीं, बल्कि किसी छोटे स्टूल पर बैठें या घुटनों के बल नीचे बैठें और सामान उठाएं।
  • कमर झुका कर काम न करें। अपनी पीठ को हमेशा सीधा रखें।
  • ऊँची एड़ी के जूते-चप्पल के बजाय साधारण जूते-चप्पल पहनें।
  • सीढ़ियाँ चढ़ते-उतरते समय सावधानी बरतें।
  • यदि कहीं पर अधिक समय तक खड़ा रहना हो तो अपनी स्थिति को बदलते रहें।
  • दायें-बायें या पीछे देखने के लिए गर्दन को ज्यादा घुमाने के बजाय शरीर को घुमाएं।
  • देर तक ड्राइविंग करनी हो तो गर्दन और पीठ के लिए तकिया रखें। ड्राइविंग सीट को कुछ आगे की ओर रखें, ताकि पीठ सीधी रहे।
  • अधिक ऊँचा या मोटा तकिया न लगाएँ। साधारण तकिए का इस्तेमाल बेहतर होता है।
  • अत्यधिक मुलायम और सख्त गद्दे पर न सोएं। स्प्रिंगदार गद्दों या ढीले निवाड़ वाले पलंग पर सोने से भी बचें।
  • पेट के बल या उलटे होकर न सोएं।
  • परंपरागत तरीकों से आराम न पहुंचे तो सर्जरी ही एकमात्र विकल्प है। लेकिन सर्जरी होगी या नहीं, यह निर्णय पूरी तरह विशेषज्ञ का होता है। 

कमर दर्द से राहत के घरेलू उपाय (Home Remedies For Back Pain)

कमर की मांसपेशियों का असंतुलित होना ही कमर दर्द का कारण होता है। कमर दर्द सही तरह से न उठने-बैठने, सोने या कमर पर क्षमता से अधिक दबाव पड़ने से होता है। लगभग 80 % लोग कभी न कभी कमर दर्द से परेशान होते हैं। कमर दर्द नया भी हो सकता है और पुराना भी हो सकता है। सतही तौर पर देखने पर कमर में होने वाला दर्द भले ही एक सामान्य सी स्थिति लगती है, लेकिन इसे नज़रअंदाज करने से समस्या काफी बढ़ सकती है।

 

जानिए कमर दर्द दूर करने के घरेलू नुस्खे (Home Remedies for Back Pain):

1. घुटने मोड़ें (Band knee)- नीचे रखी कोई वस्तु उठाते वक्त पहले अपने घुटने मोड़ें फिर उस वस्तु को उठाएं। ऐसा करने से कमर पर अनावश्यक दबाव नहीं पड़ेगा और कम तकलीफ होगी।

2. लहसुन (Garlic)- भोजन में लहसुन का पर्याप्त उपयोग करें। लहसुन कमर दर्द का अच्छा उपचार माना गया है। लहसुन के प्रयोग से पुराने से पुराना कमर दर्द भी ठीक होने लगता है।

3. गूगुल (Benzoin)- गूगुल कमर दर्द में बेहद राहत देता है। कमर दर्द में उपचार के लिए गूगुल की आधा चम्मच गरम पानी के साथ सुबह-शाम सेवन करें। ऐसा करने से कमर दर्द में आराम मिलता है।

4. मसाला चाय (Tea)- चाय बनाने में 5 कालीमिर्च के दाने, 5 लौंग पीसकर और थोड़़ा सा सूखे अदरक का पाउडर डालें। दिन मे दो बार इस तरह की मसाला चाय पीएं। मसाला चाय पीते रहने से कमर दर्द में लाभ होता है।

5. सख्त बिस्तर (Tough Bedding)- सख्त बिस्तर पर सोने से भी कमर दर्द में बेहद आराम मिलता है। ऐसा करने से कमर समतल रहती है और पूरी कमर पर समान दबाव पड़ता है। औंधे मुंह पेट के बल सोना भी हानिकारक है।

6. दालचीनी (Cinnamon)- 2 ग्राम दालचीनी का पाउडर एक चम्मच शहद में मिलाकर दिन में दो बार लेते रहने से कमरदर्द में राहत मिलती है।

7. शरीर को गर्म रखें (Warm Body)- कमर दर्द पुराना हो तो शरीर को गर्म रखें और गरम वस्तुएं खाएं। ऐसा करने से कमर दर्द में बेहद राहत मिलती है। सर्दियों में दर्द ज्यादा हो तो ध्यान रखें कि दर्द वाला हिस्सा हवा के संपर्क में न आए।

8. बर्फ की सिकाई (Ice Foment)- दर्द वाली जगह पर बर्फ का प्रयोग करना भी लाभकारी उपाय है। इससे भीतरी सूजन भी समाप्त होगी। कुछ रोज बर्फ़ का उपयोग करने के बाद गरम सिकाई प्रारंभ कर देने से अनुकूल परिणाम आते हैं।

9. पौष्टिक भोजन (Proper Nutrition)- भोजन मे टमाटर, गोभी, चुकंदर, खीरा, ककड़ी, पालक, गाजर, फ़लों का प्रचुर मात्रा में उपयोग करें।

10. भाप की सिकाई (Steam Foment)- नमक मिले गरम पानी में एक तौलिया डालकर निचोड़ लें। पेट के बल लेटकर दर्द के स्थान पर तौलिये द्वारा भाप लेने से कमर दर्द में राहत मिलती है।

11. मालिश (Massage)- रोज सुबह सरसों या नारियल के तेल में लहसुन की तीन-चार कलियाँ डालकर (जब तक लहसुन की कलियाँ काली न हो जायें) गर्म कर लें फिर ठंडा कर प्रभावित जगह पर मालिश करें।

12. नमक (Salt)- कढ़ाई में दो-तीन चम्मच नमक डालकर इसे अच्छे से सेक लें। थोड़े मोटे सूती कपड़े में यह गरम नमक डालकर पोटली बांध लें। कमर पर इसके द्वारा सेक करें।